Home आस्था अंजुमन अंसार-ए-हुसैन ने तीजे पर निकाला अलम का  जुलूस

अंजुमन अंसार-ए-हुसैन ने तीजे पर निकाला अलम का  जुलूस

बीबी सकीना की तड़प और बीबी ज़ैनब के सब्र को याद कर रो पड़े अज़ादार
MIRZAPUR NEWS: शाहिद वारसी रविवार शाम 12 मोहर्रम तीजे के मौके पर कर्बला के शहीद हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके 72 वफ़ादार साथियों की याद में मोहल्ला तरकापुर स्थित अंजुमन अंसार-ए-हुसैन की ओर से ग़मगीन माहौल में अलम का जुलूस निकाला गया। मातमी धुनों और नौहाख़्वानी के बीच अकीदतमंदों ने इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया। अंजुमन अंसार-ए-हुसैन के संयोजक इरशाद अंसारी ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 12 मोहर्रम को तीजे के अवसर पर अलम का जुलूस निकाला गया। उन्होंने कहा कि 10 मोहर्रम को इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके साथियों की शहादत के बाद भी अहलेबैत की मुश्किलें खत्म नहीं हुईं, बल्कि उनका इम्तिहान और बढ़ गया। उन्होंने बताया कि शहादत के बाद इमाम हुसैन के ख़ैमे लूट लिए गए और उनमें आग लगा दी गई। इसके बाद बीबी ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा, इमाम ज़ैनुलआबिदीन अलैहिस्सलाम, चार साल की मासूम बीबी सकीना और अन्य महिलाओं व बच्चों को क़ैद कर पहले कूफ़ा और फिर शाम (दमिश्क) ले जाया गया। रास्ते भर उन्हें तकलीफ़ें दी गईं और यज़ीद के दरबार में भी कैदियों के साथ अत्यंत दुखद व्यवहार किया गया। इसके अलावा इरशाद अंसारी ने बताया कि मासूम बीबी सकीना अपने पिता इमाम हुसैन की जुदाई में हर पल रोती रहीं। कैद और सफ़र की कठिनाइयों ने उन्हें गहरा दुख पहुँचाया। वहीं बीबी ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा ने तमाम मुश्किलों और तकलीफ़ों के बावजूद सब्र का दामन नहीं छोड़ा और कर्बला के पैग़ाम को दुनिया तक पहुँचाने का महान कार्य किया। जुलूस अपने परंपरागत मार्ग तरकापुर से संकट मोचन, रामबाग और कुरैश नगर होते हुए तरकापुर इमाम चौक पर संपन्न हुआ। इस अवसर पर इसरार अंसारी शमशेर, रिजवान अंसारी, हाफिज़ सैफ़, बिलाल, शाहिद,सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।