विपक्ष विरोधी दल नहीं, 'अवरोध पक्ष' बन गया है : प्रधानमंत्री मोदी
- 'अवरोध पक्ष' का आरोप: प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि विपक्ष ने अपने कर्तव्य का त्याग कर दिया है और वह 'विरोध पक्ष' (Virodh Paksh) की जगह 'अवरोध पक्ष' (Avrodh Paksh) बन चुका
- विकास में बाधा: उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल अपनी हताशा और निराशा के कारण देश के विकास और प्रगति के मार्ग में अड़चनें और बाधाएं पैदा कर रहे हैं।
- संविधान और एकता का मुद्दा: पीएम मोदी ने यह भी कहा कि विपक्ष राजनीति के चलते देश को विभाजित करने का प्रयास कर रहा है और संविधान की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है। इसके अलावा उन्होंने 'दिमागी नक्सल' की सोच से भी सावधान रहने की बात कही।
- राष्ट्रीय एकता दिवस पर कांग्रेस समेत विपक्ष पर साधा निशाना, बोले- देश के विकास में बाधाएं खड़ी करना ही बना लिया है राजनीति का आधार
एकता नगर (गुजरात)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में विपक्ष अब 'विरोध पक्ष' की भूमिका निभाने के बजाय 'अवरोध पक्ष' बन गया है। विपक्षी दल अपनी राजनीतिक हताशा और निराशा में देश के विकास की राह में बाधाएं खड़ी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि यह स्वस्थ लोकतांत्रिक विरोध नहीं, बल्कि विकास कार्यों में रुकावट डालने की राजनीति है।
प्रधानमंत्री शनिवार को गुजरात के एकता नगर में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि संविधान ने लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों की भूमिका निर्धारित की है। विपक्ष का दायित्व सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना और उनकी आलोचना करना है, लेकिन वर्तमान में विपक्ष अपनी जिम्मेदारी से भटकता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने विरोध करने के बजाय बाधाएं उत्पन्न करने को अपनी राजनीति बना लिया है।
मोदी ने विपक्ष पर संवैधानिक मर्यादाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ ताकतें देश को विभाजित करने और नागरिकों के बीच टकराव पैदा करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने विदेशों में होने वाली कुछ कथित गुप्त मुलाकातों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि आखिर विदेश में कौन किससे मिल रहा है और भारत विरोधी ताकतें किसका समर्थन कर रही हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम लिए बिना उनकी विदेश यात्राओं के संदर्भ में भी परोक्ष टिप्पणी की।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं और अफवाहों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल हथियार की तरह किया जा रहा है। अफवाहें फैलाकर भारत की छवि खराब करने के प्रयास किए जा रहे हैं। देशवासियों को ऐसे प्रयासों के प्रति सतर्क रहना होगा और राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने वाली ताकतों का मिलकर मुकाबला करना होगा।
नक्सलवाद और देश की सुरक्षा पर भी बोले प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद और माओवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए दावा किया कि देश में नक्सलवाद को निर्णायक रूप से कमजोर किया गया है। हालांकि उन्होंने वैचारिक स्तर पर सक्रिय 'दिमागी नक्सलियों' को चुनौती बताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने देश की सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित करने, घुसपैठ रोकने और जनसांख्यिकीय बदलावों से जुड़ी चुनौतियों पर भी अपनी बात रखी। साथ ही धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता बताई।
सरदार पटेल के योगदान को किया याद
समारोह में प्रधानमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आज जिस भारत को हम देखते हैं, उसके निर्माण में पटेल की ऐतिहासिक भूमिका रही है। स्वतंत्रता के बाद 550 से अधिक रियासतों का भारतीय संघ में एकीकरण कर उन्होंने देश की भौगोलिक और भावनात्मक एकता को मजबूत किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विविधता उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि एकता की सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय युद्ध, ऊर्जा संकट और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में व्यवधान जैसी चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत की एकता और सामूहिक शक्ति ही देश की स्थिरता तथा सफलता का आधार है। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि देश को मजबूत, सक्षम और विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य से किसी भी परिस्थिति में पीछे नहीं हटना है।
प्रधानमंत्री के इस संबोधन को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण तथा संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है।