दिल्ली में आज से प्रदूषण पर सरकार की सख्ती, गैर-BS-6 वाहनों की एंट्री पर रोक
सरकार का दावा है कि इन उपायों से राजधानी में वाहनों, निर्माण गतिविधियों और धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि योजना की वास्तविक सफलता इसके प्रभावी क्रियान्वयन और आम नागरिकों की भागीदारी पर निर्भर करेगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की ओर से घोषित इस योजना का उद्देश्य सर्दियों में खराब होने वाली हवा की गुणवत्ता को नियंत्रित करना और लोगों को प्रदूषण से होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचाना है। इसके लिए दिल्ली सरकार, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), दिल्ली पुलिस, नगर निगम और अन्य संबंधित एजेंसियों को मिलकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
गैर-BS-6 वाहनों की एंट्री पर प्रतिबंध
नई व्यवस्था के तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-6 से कम उत्सर्जन मानक वाले पेट्रोल और डीजल वाहनों को राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। हालांकि इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। एंबुलेंस, अग्निशमन वाहन, पुलिस वाहन और अन्य अधिसूचित आवश्यक सेवाओं के वाहन भी निर्धारित छूट के दायरे में रहेंगे। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर निगरानी के लिए बॉर्डर चेकिंग, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों और विशेष प्रवर्तन टीमों की मदद ली जाएगी।
बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा ईंधन
प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार ने 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' नीति को भी सख्ती से लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) नहीं रखने वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी नहीं दिया जाएगा। राजधानी के लगभग 500 पेट्रोल पंपों पर कैमरों और तकनीकी निगरानी के जरिए नियमों का पालन सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है।
निर्माण कार्यों और धूल पर भी कार्रवाई
वायु प्रदूषण में निर्माण गतिविधियों से होने वाली धूल को देखते हुए एक नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाले खुले निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर रोक लगाई गई है। आवश्यक सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को निर्धारित शर्तों के तहत छूट मिल सकती है। निर्माण स्थलों की निगरानी के लिए एआई आधारित कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा। सड़कों की नियमित सफाई, पानी का छिड़काव, मशीनीकृत सफाई और खुले में कूड़ा जलाने पर रोक जैसे कदम भी योजना का हिस्सा हैं।
50 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से काम करने की व्यवस्था
वाहनों की संख्या और यातायात से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही कार्यालयों के समय में बदलाव कर यातायात का दबाव कम करने की योजना है। अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क भी दोगुना किया जाएगा। दिल्ली सरकार लोगों को निजी वाहनों के बजाय मेट्रो, इलेक्ट्रिक बसों और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
चार महीने तक चलेगा अभियान
दिल्ली सरकार का विंटर एक्शन प्लान 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगा। सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए नियमित निरीक्षण, निगरानी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी की है। वहीं, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की ओर से लागू ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर अतिरिक्त प्रतिबंध भी लगाए जा सकेंगे।
- नो पीयूसी, नो फ्यूल (No PUC, No Fuel): जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण (PUC) प्रमाणपत्र नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल, डीजल, सीएनजी या एलपीजी ईंधन नहीं मिलेगा।
- बाहरी वाहनों पर रोक: दिल्ली के बाहर से आने वाले ऐसे वाहन जो बीएस-6 (BS-VI) मानकों का पालन नहीं करते या गैर-बीएस-4/पुराने वाहन हैं, उनकी राजधानी में एंट्री पर प्रतिबंध रहेगा।
- वर्क फ्रॉम होम (WFH): हालात और जरूरत के अनुसार सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम या कर्मचारियों की उपस्थिति का नियम लागू रहेगा।
- बदले हुए ऑफिस टाइमिंग: दिल्ली सरकार के दफ्तर सुबह 10:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक चलेंगे, जबकि नगर निगम (MCD) के दफ्तर सुबह 8:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक काम करेंगे।
- पार्किंग शुल्क: निजी वाहनों के प्रयोग को कम करने के लिए अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग फीस दोगुनी कर दी गई है।
- निर्माण कार्यों पर सख्ती: धूल प्रदूषण रोकने के लिए निर्माण और तोड़फोड़ के कामों पर निगरानी रखी जाएगी; साथ ही 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच विशेष पाबंदियां भी रहेंगी। इसके अलावा बड़े निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मोर्ग (Anti-Smog) सिस्टम और एआई-सक्षम कैमरों से निगरानी होगी।
- कचरा जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध: खुले में कूड़ा, पत्तियां या बायोमास जलाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। ]