दीप्ति की रफ्तार से कांपा एशिया, भारत की झोली में सोना!
400 मीटर रेस में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड पर कब्जा, 15 साल की उम्र में कोच ने पहचाना था हुनर
नई दिल्ली। प्रातःकाल एक्सप्रेस। भारत की स्टार पैरा एथलीट दीप्ति जीवनजी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराकर देश का मान बढ़ाया है। जापान के आइची-नागोया में आयोजित पैरा एशियाई खेलों की महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में दीप्ति ने महज 56.36 सेकंड में दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने नया गेम्स रिकॉर्ड भी कायम किया।
जापानी खिलाड़ियों को पछाड़कर जीता सोनादीप्ति ने फाइनल में जबरदस्त रफ्तार दिखाते हुए जापान की नीना कानो और अकाने काटो को पीछे छोड़ दिया। नीना कानो ने 58.92 सेकंड के साथ रजत, जबकि अकाने काटो ने 1 मिनट 0.26 सेकंड के समय के साथ कांस्य पदक हासिल किया।
इससे पहले दीप्ति ने क्वालिफाइंग हीट में 57.57 सेकंड का समय निकालकर गेम्स रिकॉर्ड बनाया था, जिसे फाइनल में और बेहतर कर दिया।
15 साल की उम्र में पहचानी गई थी प्रतिभातेलंगाना की रहने वाली दीप्ति जीवनजी की सफलता के पीछे वर्षों का संघर्ष और कठिन परिश्रम है। महज 15 वर्ष की उम्र में भारतीय खेल प्राधिकरण के कोच एन. रमेश ने राज्यस्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचाना था।
कोच के मार्गदर्शन और लगातार अभ्यास ने दीप्ति को अंतरराष्ट्रीय स्तर की धावक बना दिया।
विश्व रिकॉर्ड से पैरालंपिक पदक तक शानदार सफरदीप्ति का खेल करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने 2023 एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक हासिल किया। वर्ष 2024 में 55.07 सेकंड के विश्व रिकॉर्ड के साथ विश्व चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया। इसके बाद पेरिस पैरालंपिक में कांस्य पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपनी पहचान और मजबूत की।
दीप्ति जीवनजी की यह उपलब्धि साबित करती है कि प्रतिभा, मेहनत और मजबूत इरादों के आगे कोई बाधा बड़ी नहीं होती। उनकी सुनहरी दौड़ देश के लाखों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है।