धीरे-धीरे अपनी हनक में आ रहे मुख्य विकास अधिकारी
मीरजापुर (अमरेश चंद्र पाण्डेय/अभय त्रिपाठी) । विकासखंड पटेहरा के परमापुर जलागम क्षेत्र में उत्तर प्रदेश सरकार की राज्य कृषि विकास योजना (SADP) के अंतर्गत ICRISAT द्वारा संचालित जल संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन परियोजना का मुख्य विकास अधिकारी, विजय कुमार सिंह ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान ICRISAT की टीम के श्री आर. के. उत्तम एवं डॉ. अशोक शुक्ला ने परियोजना की प्रगति एवं विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी।
ICRISAT टीम ने बताया कि वर्ष 2025–26 से 2028–29 तक संचालित इस परियोजना का क्षेत्रफल 7,996 हेक्टेयर है और इसके अंतर्गत 23 गांवों में विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। परियोजना की कुल वित्तीय लागत ₹1,692 लाख है। परियोजना का प्रमुख उद्देश्य वर्षा जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, सूखे के प्रभाव को कम करना तथा किसानों के बीच जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है।
परियोजना के अंतर्गत अब तक 2 जल संचयन बांधों (WHBs) का निर्माण/पुनर्जीवन, लगभग 10 किलोमीटर नाले का गहरीकरण एवं चौड़ीकरण, 5 नाला प्लग, 13 छोटे-बड़े तालाबों की खुदाई तथा लगभग 1,000 एकड़ क्षेत्र में खेतों की मेड़बंदी का कार्य किया जा चुका है। इन जल संरक्षण संरचनाओं से लगभग 2.5 लाख घन मीटर वर्षा जल के संचयन की क्षमता विकसित हुई है।
कृषि क्षेत्र में परियोजना के तहत लगभग 161 एकड़ में मूंगफली, मूंग, तिल एवं अरहर की प्रदर्शन फसलें लगाई गई हैं। इसके साथ ही लगभग 7 हेक्टेयर क्षेत्र में आम, अमरूद, नींबू, आंवला, बेल एवं एप्पल बेर आधारित फलदार कृषिवानिकी विकसित की गई है, जिसमें अब तक लगभग 12,100 पौधों का रोपण किया जा चुका है।
निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने ग्राम बेलहरा में निर्मित जल संचयन बांध एवं पक्के नाला प्लग का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने गांव में स्थापित स्वचालित मौसम प्रणाली (AWS) का भी निरीक्षण किया। AWS के माध्यम से वर्षा, तापमान, आर्द्रता एवं हवा से संबंधित मौसम संबंधी आंकड़े नियमित रूप से दर्ज किए जा रहे हैं। इन आंकड़ों के आधार पर किसानों को मोबाइल फोन के माध्यम से मौसम पूर्वानुमान एवं कृषि परामर्श (Agro-Advisory) उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उन्हें बुवाई, सिंचाई एवं अन्य कृषि कार्यों के संबंध में समय पर निर्णय लेने में सहायता मिल रही है।
निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने किसानों से संवाद कर परियोजना के प्रभावों की जानकारी ली। किसानों ने बताया कि जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण से सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता में सुधार हुआ है तथा भूजल स्तर में वृद्धि के कारण पेयजल उपलब्धता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
निरीक्षण के उपरांत श्री वी. के. सिंह ने जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, मृदा संरक्षण और जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे कार्यों को उपयोगी एवं प्रभावी बताया। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों एवं मौसम आधारित कृषि परामर्श से जोड़ने के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।
यह परियोजना क्षेत्र में जल सुरक्षा, कृषि उत्पादकता, फसल विविधीकरण तथा किसानों की जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आ रही है।