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दक्षिण अमेरिका में तांबे का खजाना तलाशेगा भारत, HCL की चिली में कॉपर एक्सप्लोरेशन से मजबूत होगी मिनरल सिक्योरिटी
भारत ने अपनी महत्वपूर्ण खनिज जरूरतों को सुरक्षित करने की दिशा में दक्षिण अमेरिका का रुख तेज किया है। हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) चिली में कॉपर एक्सप्लोरेशन पर काम आगे बढ़ा रही है। सरकार के मुताबिक, विदेशों में खनिज संपत्तियों की खोज और विकास से भारत की कॉपर सप्लाई और मिनरल सिक्योरिटी को मजबूती देने में मदद मिल सकती है।
नई दिल्ली। भारत अपनी बढ़ती औद्योगिक और रणनीतिक जरूरतों के लिए तांबे की आपूर्ति को मजबूत करने की दिशा में विदेशों में खनिज संसाधनों की तलाश कर रहा है। इसी कड़ी में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) की नजर दक्षिण अमेरिका के चिली पर है। कंपनी की चिली में कॉपर एक्सप्लोरेशन की गतिविधियां आगे बढ़ रही हैं।
तांबा बिजली, इलेक्ट्रॉनिक्स, निर्माण, परिवहन और अक्षय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण धातु है। भारत के कॉपर विजन डॉक्यूमेंट के अनुसार देश में घरेलू स्तर पर उपलब्ध तांबे के भंडार सीमित हैं, जबकि चिली और पेरू जैसे देशों के पास दुनिया के बड़े कॉपर रिजर्व हैं। ऐसे में विदेशों में कॉपर संसाधनों की खोज भारत की दीर्घकालिक सप्लाई रणनीति का हिस्सा है।
चिली में HCL की तलाश क्यों अहम?
HCL भारत की सरकारी कंपनी है और देश में कॉपर माइनिंग से जुड़ी प्रमुख कंपनी है। अगस्त 2026 में कंपनी ने बताया था कि चिली में उसकी माइन एक्सप्लोरेशन गतिविधियां अपेक्षित दिशा में आगे बढ़ रही हैं। कंपनी भारत में भी अपनी खनन क्षमता बढ़ाने और बंद खदानों को फिर से खोलने की दिशा में काम कर रही है।
भारत सरकार महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की आपूर्ति को मजबूत करने के लिए घरेलू और विदेशी दोनों स्तरों पर एक्सप्लोरेशन को बढ़ावा दे रही है। जून 2026 तक केंद्र सरकार के स्तर पर 56 महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी थी।
विदेशों में खनिज संपत्तियों पर भी नजर
भारत की विदेशों में महत्वपूर्ण खनिज संपत्तियां हासिल करने की रणनीति में Khanij Bidesh India Limited (KABIL) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। KABIL में NALCO, HCL और MECL शामिल हैं और इसका उद्देश्य विदेशों में खनिज संपत्तियों की पहचान, अधिग्रहण और विकास के जरिए भारत की खनिज आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है।
भारत के लिए क्यों जरूरी है कॉपर?
कॉपर का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन, पावर ग्रिड, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, निर्माण और औद्योगिक मशीनरी समेत कई क्षेत्रों में होता है। ऊर्जा संक्रमण और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विस्तार के साथ तांबे की मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ विदेशों में संसाधनों तक पहुंच बनाना भारत की मिनरल सिक्योरिटी के लिहाज से महत्वपूर्ण है।