व्यापार
चीन में बढ़ी ‘Made in India’ की डिमांड, 5 महीने में 9.6 अरब डॉलर के भारतीय सामान की खरीदारी
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच व्यापार को लेकर एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। चीन से भारत में बड़े पैमाने पर सामान आयात होने के बीच अब चीन को भारत से होने वाले निर्यात में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों यानी अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान भारत का चीन को निर्यात करीब 39 प्रतिशत बढ़कर 9.6 अरब डॉलर पहुंच गया।
इलेक्ट्रॉनिक्स बने निर्यात की बड़ी ताकत
भारत से चीन को भेजे जाने वाले सामान में इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग उत्पाद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े उत्पादों में खास तौर पर प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली (PCBA), स्मार्टफोन, डिस्प्ले मॉड्यूल और टेलीकॉम उपकरण जैसी श्रेणियों में तेजी देखने को मिली है।
विशेषज्ञों और उद्योग जगत के अनुसार, दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर के विस्तार से इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट और संबंधित उत्पादों की मांग बढ़ी है। भारत में बढ़ती इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का फायदा निर्यात को भी मिल रहा है।
चीन को भारत का निर्यात कितना बढ़ा?
अप्रैल-अगस्त 2025-26 की तुलना में इसी अवधि में चीन को भारतीय निर्यात में 39 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस दौरान चीन को भारत का निर्यात 9.6 अरब डॉलर रहा। चार प्रमुख मूल BRICS देशों—चीन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और रूस—को भारत का कुल निर्यात भी 34 प्रतिशत बढ़कर 19.9 अरब डॉलर हो गया।
इन चार देशों की भारत के कुल निर्यात में हिस्सेदारी भी बढ़ी है। अप्रैल-अगस्त 2026-27 में यह हिस्सेदारी 9.2 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 8.1 प्रतिशत थी।
दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और रूस को भी बढ़ा निर्यात
चीन के अलावा भारत के अन्य प्रमुख BRICS साझेदारों के साथ भी निर्यात में वृद्धि हुई है। अप्रैल-अगस्त 2026 के दौरान:
दक्षिण अफ्रीका: निर्यात 58% बढ़ा
ब्राजील: निर्यात 13% बढ़ा
रूस: निर्यात 11% बढ़ा
चीन: निर्यात 39% बढ़ा
दक्षिण अफ्रीका में वृद्धि दर सबसे ज्यादा रही, जबकि कुल मूल्य के लिहाज से चीन चारों देशों में भारत के लिए सबसे बड़ा निर्यात बाजार रहा।
जापान, इटली और दक्षिण कोरिया में भी भारतीय सामान की मांग
भारत के निर्यात में मजबूती केवल चीन और BRICS देशों तक सीमित नहीं रही। अप्रैल-अगस्त 2026-27 में जापान को भारत का निर्यात 43 प्रतिशत बढ़कर 3.43 अरब डॉलर पहुंच गया। इटली को निर्यात करीब 30 प्रतिशत बढ़कर 3.92 अरब डॉलर और दक्षिण कोरिया को निर्यात 22 प्रतिशत बढ़कर 3.21 अरब डॉलर रहा।
जापान को निर्यात में मिनरल फ्यूल, इलेक्ट्रॉनिक्स और एल्युमिनियम का योगदान रहा, जबकि दक्षिण कोरिया को मिनरल्स, फ्यूल, इलेक्ट्रॉनिक्स, एल्युमिनियम, आयरन-स्टील और केमिकल्स जैसे उत्पादों की मांग रही।
क्या इससे भारत-चीन व्यापार संतुलन बदलेगा?
निर्यात में यह तेजी महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इससे फिलहाल भारत और चीन के बीच व्यापार असंतुलन खत्म नहीं हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने चीन से 131.63 अरब डॉलर का सामान आयात किया था, जबकि चीन को भारत का निर्यात 19.47 अरब डॉलर रहा। इसी वजह से भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा करीब 112.16 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर रहा।
इसलिए चीन को भारतीय निर्यात में 39 प्रतिशत की वृद्धि को भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए सकारात्मक बदलाव के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन दोनों देशों के कुल व्यापार में चीन से होने वाले भारतीय आयात अभी भी काफी अधिक हैं।
‘Made in India’ के लिए क्यों अहम है यह आंकड़ा?
चीन को भारतीय उत्पादों का बढ़ता निर्यात इस बात की ओर इशारा करता है कि भारत की मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन क्षमता वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी जगह बना रही है। खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ना भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरकार Make in India और PLI जैसी नीतियों के जरिए घरेलू विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा दे रही है।
हालांकि, चीन के साथ व्यापार में भारत के लिए बड़ी चुनौती अभी भी आयात-निर्यात के बीच मौजूद भारी अंतर है। ऐसे में चीन को भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग उत्पादों और अन्य विनिर्मित वस्तुओं का निर्यात बढ़ना आने वाले समय में व्यापार संतुलन सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कारक हो सकता है।