समय के साथ ऐतिहासिक घटनाओं की समझ, व्याख्या में आता है परिवर्तन : प्रो. आलोक प्रसाद शासी निकाय के अध्यक्ष पंकज जायसवाल ने प्रासंगिकता पर रखे विचार
प्रयागराज। आर्य कन्या डिग्री कॉलेज के मध्यकालीन इतिहास विभाग एवं आईक्यूएसी की ओर से ‘18वीं शताब्दी का भारत विवाद : प्रमुख दृष्टिकोण एवं हाल के विकास’ विषय पर व्याख्यान आज आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. आलोक प्रसाद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता, शासी निकाय के अध्यक्ष पंकज जायसवाल ने की। कार्यक्रम के अध्यक्ष पंकज जायसवाल ने कहा कि इतिहास के अध्ययन, उसके विभिन्न दृष्टिकोणों और समकालीन संदर्भों में उसकी प्रासंगिकता पर विचार रखे। प्रो. प्रसाद ने मार्क्सवादी इतिहासकारों के दृष्टिकोण, क्रिस बेरी के परिप्रेक्ष्य तथा संशोधनवादी इतिहास लेखन की चर्चा करते हुए इतिहास की प्रचलित धारणाओं का आलोचनात्मक विश्लेषण किया। उन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की व्याख्या के प्रारंभिक एवं आधुनिक दृष्टिकोणों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि समय के साथ ऐतिहासिक घटनाओं की समझ और उनकी व्याख्या में परिवर्तन आता है। उन्होंने आधुनिकता की अवधारणा पर विचार रखते हुए कहा कि आधुनिकता को किसी बाहरी संक्रमण या ‘वायरस’ की तरह नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उसे ऐतिहासिक और सामाजिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में समझना आवश्यक है। साथ ही, उन्होंने मानसिक उपनिवेशवाद से मुक्ति और अपने दृष्टिकोण के डिकोलोनाइजेशन की आवश्यकता पर भी बल दिया। व्याख्यान में गनपाउडर के आविष्कार और उसके ऐतिहासिक प्रभावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने इतिहास को बहुआयामी दृष्टि से समझने की प्रेरणा दी। व्याख्यान अत्यंत संवादात्मक रहा। छात्राओं ने विषय से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका मुख्य वक्ता ने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। इस दौरान छात्राओं से भी प्रश्न पूछे गए, जिससे उनकी विषयगत समझ और आलोचनात्मक चिंतन को प्रोत्साहन मिला। कार्यक्रम का समन्वयन मध्यकालीन इतिहास विभाग की डॉ. नाज़नीन फ़ारूक़ी, डॉ. अर्चना सिंह एवं डॉ. सुधा कुमारी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन चीफ प्रॉक्टर डॉ. रंजना त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय की सलाहकार डॉ. ममता गुप्ता, उप-प्राचार्या प्रो. ईभा सिरोठिया, मुख्य प्रॉक्टर डॉ. रंजना त्रिपाठी, डॉ. दीपशिखा, डॉ. मुदिता, डॉ. सव्यसाँची, डॉ. हेमलता, डॉ. शिवानी , डॉ. शिखा, सहित महाविद्यालय की अन्य शिक्षिकाएँ एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।