महंगाई और बदहाल व्यवस्था के खिलाफ यूरोप में जनआक्रोश, फ्रांस-जर्मनी समेत कई देशों में प्रदर्शन
- प्रदर्शनकारी: आंतरिक मंत्रालय के अनुसार, फ्रांस में करीब 3.20 लाख लोग सड़कों पर उतरे। [1]
- हिंसा और झड़प: पेरिस, लियोन और टूलूज समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें हुईं। प्रदर्शनकारियों ने कांच की बोतलें, पटाखे और पथराव किया, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले, स्टन ग्रेनेड और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
- गिरफ्तारियां: फ्रांसीसी अधिकारियों ने देशभर में 560 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है।
- जर्मनी: फ्रैंकफर्ट में प्रदर्शन हिंसक होने के बाद दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की खबरें आईं। कोलोन में पुलिस को भीड़ हटाने के लिए वाटर कैनन का उपयोग करना पड़ा, जबकि बर्लिन और हैम्बर्ग में भी प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बोतलें और अंडे फेंके तथा बैरिकेड्स में आग लगाई।
- अन्य देश: इटली (मिलान और रोम), स्पेन और अल्बानिया (तिराना) में भी महंगाई और वेतन में असंतुलन के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं।
पेरिस/बर्लिन। महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था में गिरावट और आवास संकट के खिलाफ यूरोप के कई देशों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। शनिवार को फ्रांस में लगातार तीसरे सप्ताह हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे, जबकि जर्मनी, पुर्तगाल और नीदरलैंड में भी युवाओं और सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन किए। फ्रांस में कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और उपद्रव के आरोप में 560 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया।
फ्रांस में तीसरे सप्ताह भी जारी रहा आंदोलन
फ्रांस के विभिन्न शहरों में शनिवार को हुए प्रदर्शनों में सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा दिखाई दिया। फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, देशभर में लगभग 3.20 लाख लोगों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इससे पहले 24 अक्टूबर को करीब 4.10 लाख और 17 अक्टूबर को लगभग 5.50 लाख लोग सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या युवाओं, विद्यार्थियों, श्रमिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की रही।
प्रदर्शन की शुरुआत सरकारी स्कूलों की बदहाल इमारतों, शिक्षकों की कमी और विश्वविद्यालयों में प्रवेश की व्यवस्था को लेकर विद्यार्थियों की नाराजगी से हुई थी। धीरे-धीरे इसमें महंगाई, कम वेतन, बेरोजगारी, महंगे मकान और सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट जैसे मुद्दे भी जुड़ गए। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए।
पेरिस समेत कई शहरों में पुलिस से झड़प
राजधानी पेरिस के अलावा लियोन, मार्सिले, लिली और टूलूज में भी प्रदर्शन हुए। अधिकांश रैलियां शांतिपूर्ण रहीं, लेकिन कुछ स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई। प्रदर्शनकारियों के छोटे समूहों ने सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया, आगजनी की और पुलिस पर बोतलें तथा पटाखे फेंके। जवाब में पुलिस ने आंसू गैस और अन्य भीड़ नियंत्रण उपायों का इस्तेमाल किया।
फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक शनिवार रात तक 560 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए देशभर में करीब 70 हजार पुलिसकर्मियों और जेंडरमेरी के जवानों को तैनात किया गया था। पेरिस के कुछ इलाकों में रात के समय आवागमन पर प्रतिबंध भी लगाए गए।
जर्मनी में युवाओं ने शिक्षा और रोजगार को लेकर खोला मोर्चा
फ्रांस के बाद विरोध प्रदर्शनों का असर जर्मनी में भी देखने को मिला। यहां 'Gen Z regelt' नामक युवा आंदोलन के आह्वान पर 30 से अधिक शहरों में प्रदर्शन आयोजित किए गए। बर्लिन, हैम्बर्ग, फ्रैंकफर्ट, कोलोन और म्यूनिख सहित कई शहरों में युवाओं ने बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार, सस्ते आवास और जलवायु संरक्षण के लिए अधिक सरकारी निवेश की मांग की।
युवाओं ने अनिवार्य सैन्य सेवा दोबारा लागू किए जाने की संभावनाओं का भी विरोध किया। बर्लिन के ब्रांडेनबर्ग गेट पर बड़ी संख्या में विद्यार्थी और युवा एकत्र हुए। कुछ शहरों में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव हुआ। फ्रैंकफर्ट में दुकानों के शीशे तोड़े जाने और लूटपाट की घटनाएं सामने आईं, जबकि हैम्बर्ग में कुछ अवरोधकों में आग लगा दी गई। कोलोन में पुलिस ने स्थिति बिगड़ने पर प्रदर्शन मार्च को बीच में ही समाप्त करा दिया।
पुर्तगाल और नीदरलैंड में भी विरोध की आवाज
पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में हजारों लोगों ने आवास संकट और बढ़ती कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन किया। लोगों ने सस्ते मकान उपलब्ध कराने और सरकार से प्रभावी कदम उठाने की मांग की। नीदरलैंड के हेग शहर में भी संभावित विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। हालांकि वहां दोपहर तक किसी बड़ी हिंसक घटना की सूचना नहीं थी।
5 नवंबर को फ्रांस में राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान
फ्रांस में श्रमिक संगठनों और विद्यार्थी समूहों ने 5 नवंबर को राष्ट्रव्यापी हड़ताल और विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि सरकार को शिक्षा, आवास, रोजगार और सार्वजनिक सेवाओं की समस्याओं पर ठोस कदम उठाने चाहिए। दूसरी ओर फ्रांस सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
यूरोप के विभिन्न देशों में एक साथ उभर रहे इन आंदोलनों ने महंगाई, युवाओं के भविष्य, शिक्षा और आवास जैसे मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में सरकारों की प्रतिक्रिया और प्रस्तावित हड़ताल से आंदोलन की दिशा तय होने की संभावना है।