इजरायल में नई राजनीतिक हलचल, अरब दलों के प्रदर्शन से गठबंधन की संभावनाएं बढ़ीं
- सीटों का गणित: 120 सदस्यीय नेसेट (इजरायली संसद) में बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी गादी आइज़नकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिलती दिख रही हैं।
- अरब पार्टियों की भूमिका: 'राम' (Ra'am) और 'द जॉइंट लिस्ट' (The Joint List) जैसे अरब दलों ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए रिकॉर्ड 19 सीटें हासिल की हैं।
- गठबंधन की संभावनाएं: यदि आइज़नकोट का विपक्षी गुट इन अरब पार्टियों के साथ हाथ मिला लेता है, तो उनका आंकड़ा बहुमत (61 या उससे अधिक) को पार कर सकता है। इस बदलाव को लेकर इजरायल के कई शहरों में प्रदर्शन भी हो रहे हैं, जहां प्रदर्शनकारी यहूदी और अरब पार्टियों के गठबंधन की मांग कर रहे हैं ताकि नेतन्याहू को सत्ता से बाहर किया जा सके।
- विपक्ष के भीतर मतभेद: विपक्षी खेमे में सब एक राय नहीं हैं। 'यिसरायल बेइतेनु' पार्टी के नेता एविग्डोर लिबरमैन और कुछ अन्य नेता अरब पार्टियों के साथ गठबंधन का विरोध कर रहे हैं, जबकि याइर गोलन और मंसूर अब्बास (राम पार्टी) जैसे नेता बातचीत के पक्ष में हैं।
- आधिकारिक परिणाम: NextVenge News की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय चुनाव आयोग 4 नवंबर 2026 तक अंतिम परिणाम जारी कर सकता है, जिसके बाद राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग विभिन्न दलों से परामर्श करेंगे। तेल अवीव। इजरायल के हालिया संसदीय चुनाव के बाद देश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के बाद अरब नेतृत्व वाली राजनीतिक पार्टियां सरकार गठन में निर्णायक भूमिका में आ गई हैं। चुनाव में अरब नेतृत्व वाले दलों ने रिकॉर्ड 19 सीटें हासिल की हैं। इस राजनीतिक बदलाव के बीच यहूदी और अरब समुदायों के बीच साझा सरकार बनाने की मांग भी तेज हो गई है।
शनिवार रात तेल अवीव के हबीमा स्क्वायर पर हजारों लोगों ने प्रदर्शन कर विपक्षी नेताओं से अरब राजनीतिक दलों के साथ मिलकर सरकार बनाने की अपील की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि चुनाव में बदलाव के पक्ष में मिले जनादेश को नई सरकार में भी प्रतिबिंबित किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने यहूदी और अरब नागरिकों के बीच समानता, राजनीतिक भागीदारी और साझा लोकतांत्रिक व्यवस्था की मांग उठाई। यरुशलम, हाइफा, बीयरशेवा और अन्य शहरों में भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए गए।
19 सीटों ने बदला सरकार गठन का गणित
इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का समर्थन आवश्यक है। 27 अक्टूबर को हुए चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को 48 सीटें हासिल हुई हैं। वहीं, अरब नेतृत्व वाली दो प्रमुख राजनीतिक इकाइयों राआम और ज्वाइंट लिस्ट ने मिलकर 19 सीटें प्राप्त की हैं।
इस तरह अरब दलों का समर्थन मिलने पर विपक्षी खेमे के पास 67 सीटों का संभावित आंकड़ा पहुंच सकता है, जो बहुमत के लिए पर्याप्त है। हालांकि, सरकार गठन का रास्ता इतना आसान नहीं है, क्योंकि विपक्षी गठबंधन के सभी नेता अरब दलों के साथ सत्ता साझा करने को लेकर एकमत नहीं हैं।
नेतन्याहू के सामने राजनीतिक चुनौती
चुनाव परिणाम के बाद नेतन्याहू की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनकी पार्टी लिकुड 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन सहयोगी दलों के साथ मिलकर भी उनका गठबंधन बहुमत से पीछे है। नेतन्याहू ने चुनाव में अरब दलों की सफलता और मतदान प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर अरब राजनीतिक नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपने मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों पर जोर दिया है।
यहूदी-अरब गठबंधन को लेकर विपक्ष में मतभेद
विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने गठबंधन के सभी घटक दलों को एक मंच पर लाने की है। उन्होंने पहले चुनाव प्रचार के दौरान अरब दलों के साथ गठबंधन की संभावना को लेकर सीमित रुख अपनाया था। हालांकि चुनाव के बाद उन्होंने सरकार गठन के लिए कुछ राजनीतिक सिद्धांत सामने रखे हैं और उन सिद्धांतों से सहमत सांसदों को साथ आने का संकेत दिया है।
वहीं, राआम पार्टी के नेता मंसूर अब्बास ने सरकार गठन में सहयोग की इच्छा जताई है। ज्वाइंट लिस्ट के नेता यूसुफ जबरीन भी नेतन्याहू के विकल्प के रूप में बनने वाली सरकार को बाहर से समर्थन देने की संभावना जता चुके हैं। दूसरी ओर एविग्डोर लिबरमैन ने अरब दलों के साथ सरकार में शामिल होने का विरोध किया है।
यहूदी-अरब साझेदारी का नया प्रयोग
प्रदर्शनकारियों का मानना है कि इजरायल के अरब नागरिकों को भी देश की सरकार और नीतियां तय करने में समान भागीदारी मिलनी चाहिए। आंदोलन से जुड़े संगठनों ने कहा कि अरब और यहूदी नागरिकों के वोट का लोकतांत्रिक महत्व समान है और सरकार गठन में भी इसे स्वीकार किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि इजरायल की राजनीति में अरब दलों की भूमिका लंबे समय तक सीमित रही है। वर्ष 2021 में मंसूर अब्बास की राआम पार्टी पहली स्वतंत्र अरब पार्टी बनी थी, जिसने इजरायल की गठबंधन सरकार में भागीदारी की थी। अब 19 सीटों के साथ अरब दल एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गए हैं।
फिलहाल राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत निर्वाचित दलों से परामर्श के बाद सरकार गठन की जिम्मेदारी किसी सांसद को सौंपी जाएगी। यदि कोई भी पक्ष बहुमत जुटाने में सफल नहीं होता है तो देश में दोबारा चुनाव की नौबत भी आ सकती है। ऐसे में इजरायल की राजनीति में आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे।