खेती-किसानी में महिलाओं का योगदान अतुलनीय, वैज्ञानिक तकनीकों और कृषि उद्यमिता से समृद्धि की नई राह दिखा रहीं महिला किसान कृषि भवन सभागार में राष्ट्रीय महिला किसान दिवस का आयोजन
कुशीनगर -: कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महिला किसानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। महिलाएं पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती, श्रीअन्न उत्पादन, बागवानी तथा कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। इसी योगदान को सम्मान देने, महिला किसानों को प्रोत्साहित करने तथा उन्हें कृषि की नवीन तकनीकों एवं विभागीय योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से आज कृषि भवन सभागार, रामपुर फार्म, कुशीनगर में राष्ट्रीय महिला किसान दिवस का आयोजन किया गया।
संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 2026 को अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष के रूप में घोषित किए जाने के क्रम में आयोजित इस कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न विकास खंडों से आईं महिला कृषकों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक अतीन्द्र सिंह, जिला कृषि अधिकारी संजीव कुमार सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र, सरगटिया के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉ. अरुण प्रताप सिंह तथा गन्ना विभाग के एससीडीआई अखिलेश्वर सिंह सहित अन्य विभागीय अधिकारी एवं कृषि विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में उप कृषि निदेशक अतीन्द्र सिंह ने उपस्थित कृषि वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों एवं प्रगतिशील महिला किसानों का स्वागत करते हुए कृषि क्षेत्र में महिलाओं के योगदान की सराहना की। इस अवसर पर प्रगतिशील महिला कृषक श्रीमती ललिता सिंह, श्रीमती उर्मिला देवी, श्रीमती अंजलि पाण्डेय, श्रीमती जैवून, श्रीमती सरोज देवी एवं श्रीमती शिवानी द्विवेदी ने अपने कृषि कार्यों, नवाचारों और अनुभवों को साझा किया। उन्होंने खेती-किसानी में आने वाली चुनौतियों तथा बेहतर उत्पादन एवं आय वृद्धि के लिए अपनाए जा रहे उपायों पर भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम के दौरान सहायक विकास अधिकारी (कृषि) फाजिलनगर श्रीमती प्रीति सिंह ने प्रगतिशील महिला कृषकों को शॉल ओढ़ाकर एवं माला पहनाकर सम्मानित किया।
*पराली प्रबंधन, प्राकृतिक खेती और श्रीअन्न से आय बढ़ाने पर जोर* कृषि विज्ञान केंद्र, सरगटिया के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉ. अरुण प्रताप सिंह ने महिला किसानों को कृषि में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने पराली प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, श्रीअन्न के उत्पादन तथा औद्यानिक फसलों के प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन की उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कृषि उत्पादों को प्रसंस्कृत कर बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त करने तथा उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग करने से महिला किसान अपनी आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकती हैं।
*गन्ने की पौध तैयार करने में महिला स्वयं सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका* गन्ना विभाग के एससीडीआई श्री अखिलेश्वर सिंह ने गन्ने की उन्नत पौध तैयार करने एवं बीज विस्तार के कार्यों में महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लगभग 1.5 लाख गन्ने की पौध तैयार की जा रही है। गन्ना विभाग और चीनी मिलों के संयुक्त प्रयास से गन्ने की गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार कराई जाती है, जिससे बीज प्रतिस्थापन दर में सुधार और उन्नत पौध की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलती है। महिला किसानों को अनुदान पर पौध उपलब्ध कराने की व्यवस्था के संबंध में भी जानकारी दी गई।
*महिला किसान ग्रामीण भारत की रीढ़, आधुनिक तकनीकों से खुलेंगे आत्मनिर्भरता के नए अवसर* उप कृषि निदेशक अतीन्द्र सिंह ने कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए महिला किसानों से इनका लाभ उठाने तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महिला किसान बहनें ग्रामीण भारत की रीढ़ हैं। वे न केवल परिवार की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, बल्कि कृषि उत्पादन, पशुपालन, बागवानी और कृषि आधारित उद्यमों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करती हैं।
उन्होंने कहा कि आज महिला किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, प्राकृतिक खेती और कृषि उद्यमिता को अपनाते हुए कुशीनगर को नई पहचान दे रही हैं। महिला किसानों के अनुभव, परिश्रम और नवाचार कृषि क्षेत्र की प्रगति के महत्वपूर्ण आधार हैं। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य उनके योगदान को पहचान देना, उन्हें सम्मानित करना, नवीन तकनीकों के प्रति जागरूक करना तथा सरकारी योजनाओं से जोड़कर उनकी आय एवं आजीविका को सुदृढ़ बनाना है।
कार्यक्रम के माध्यम से महिला किसानों को कृषि विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने, नवीन तकनीकों की जानकारी प्राप्त करने तथा अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिला। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी अतिथियों, कृषि विशेषज्ञों, अधिकारियों एवं महिला किसान बहनों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।