एनटीपीसी संयंत्र की उड़ती राख से ग्रामीणों का जीना मुहाल, स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा
मेजा प्रयागराज ग्रामीणों का आरोप है कि इस प्रदूषण के कारण ग्रामीणों के जन-जीवन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है। हवा में उड़ने वाली बारीक राख (फ्लाई ऐस) खुले में रखे खाने-पीने के समान और पानी के पीने को स्रोतों में हैंडपंप और तालाबों में मिल रही है। खेतों और फसलों पर रख की मोटी परत जमने के कारण साग सब्जियां और अनाज ठीक से नहीं रख पा रहे हैं। इसी कारण से किसानों को खेती पर प्रभाव पड़ रहा है, जिससे खेतो में पैदावार फहले से कम हो गया है। जिससे किसानों की आवश्यकता और घरेलू खान-पान दोनों प्रभावित हो रहे हैं। गंभीर बीमारियों का लगातार सांस के साथ अंदर जाने वाली राख के कारण बच्चों महिलाओं और बुजुर्गों में दमा सांस की तकलीफ की बीमारियां तेज से बढ़ रहा हैं। आंखों में जलन और त्वचा संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रहा है। राख की धूल घरों के भीतर तक घुस रही है जिस बर्तन बिस्तर और कपड़े चैबीस घंटे धूल से सने हैं। यह बेहद निराशा जनक और चिंताजनक स्थिति है। ग्रामीणों द्वारा एसडीएम ध्डीएम और एनटीपीसी मेजा ऊर्जा निगम प्रबंधन को सौंप गए विज्ञापनों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस प्रकार की उपेक्षा से स्पष्ट होता है कि स्थानीय स्तर पर अधिकारी प्रदूषण और स्वास्थ्य संकट को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। ग्रामीणों ने ज्ञापन में अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा था कि फ्लाई ऐस (राख) के अनियंत्रित और गैर कानूनी परिवहन के कारण पूरे क्षेत्र में डस्ट (धूल) का गुब्बारा छाया रहता है। जिससे लोगों को सांस लेने में कठिनाई होती है, और सांस की बीमारियां बढ़ रही है जन-जीवन यस्त-व्यस्त हो गया हैं।लेकिन स्थानीय शासन - प्रशासन की ढुलमुल और अपेक्षापूर्ण रवैये के कारण जमीन पर कोई सुधार नहीं किया जा रहा है। इसी तरह ग्रामीणों पर समस्या बनी रही तो उनके जन-जीवन और स्वास्थ्य पर बहुत बड़ा बीमारियों का सामना करना पड़ सकता हैं कौन उनका जन-जीवन यस्त-ब्यस्त हो सकता हैं। दिसम्बर 2026 को कई बार राजनीतिक पार्टी और सामाजिक संस्था और प्रधानों ने इस समस्या पर विरोध और लिखित शिकायत किये लेकिन कोई सुनवाई और न कोई सुधार हुआ। ऐसा नही है कि जिला प्रशासन या स्थानीय सांसद या विधायक को इस गंभीर समस्या से अवगत न हो, इस स्थित में ग्रमीणों का कहना है कि भाजपा के सरकार में बुलडेजर बाबा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी महाराज जी के राज्य में ग्रामीणों को कब न्याय मिलेगा और इस समस्या से कब निजाद मिलेगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस प्रदूषण के कारण ग्रामीणों के जन-जीवन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है। हवा में उड़ने वाली बारीक राख (फ्लाई ऐस) खुले में रखे खाने-पीने के समान और पानी के पीने को स्रोतों में हैंडपंप और तालाबों में मिल रही है। खेतों और फसलों पर रख की मोटी परत जमने के कारण साग सब्जियां और अनाज ठीक से नहीं रख पा रहे हैं। इसी कारण से किसानों को खेती पर प्रभाव पड़ रहा है, जिससे खेतो में पैदावार फहले से कम हो गया है। जिससे किसानों की आवश्यकता और घरेलू खान-पान दोनों प्रभावित हो रहे हैं। गंभीर बीमारियों का लगातार सांस के साथ अंदर जाने वाली राख के कारण बच्चों महिलाओं और बुजुर्गों में दमा सांस की तकलीफ की बीमारियां तेज से बढ़ रहा हैं।