बार की सदस्यता को लेकर अधिवक्ता और बार संघ में टकराव, फर्नीचर गायब करने का आरोप अधिवक्ता बोलीं- मिलीभगत कर रोकी सदस्यता, बार अध्यक्ष बोले- नियमों का पालन करें, दूसरे बार का NOC लाना होगा
ब्यूरो कुशीनगर....
पडरौना, कुशीनगर। जिला एवं सत्र न्यायालय बार एसोसिएशन पडरौना में सदस्यता को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक महिला अधिवक्ता ने बार अध्यक्ष, महामंत्री और जिला जज की मिलीभगत से सदस्यता न देने और रात में उनकी कुर्सी-मेज व फर्नीचर गायब कराने का आरोप लगाते हुए अपील प्रकाशित की है।
अधिवक्ता का दावा है कि उनके पास वैध पंजीकरण प्रमाण-पत्र और सीओपी (Certificate of Practice) है और अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 30 के तहत उन्हें प्रैक्टिस से नहीं रोका जा सकता। उन्होंने फर्नीचर गायब होने को लेकर न्याय और निष्पक्ष व्यवस्था की मांग की है।
बार अध्यक्ष ने आरोपों को नकारा
वहीं बार एसोसिएशन पडरौना के अध्यक्ष प्रमोद सिंह श्रीनेत ने आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिवक्ता वर्तमान में बार संघ पडरौना की सदस्य नहीं हैं। सदस्य न होने का मतलब यह नहीं कि वह वकालत नहीं कर सकतीं, वह पूरे उत्तर प्रदेश में कहीं भी प्रैक्टिस कर सकती हैं, लेकिन पडरौना बार की सदस्यता के लिए संघ के नियमों का पालन करना होगा।
अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि एक अधिवक्ता एक समय में एक ही बार की सदस्य हो सकती है। यदि वह किसी अन्य बार की सदस्य हैं तो वहां से एनओसी और यह शपथपत्र देना होगा कि उनके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं है। दस्तावेज पूरे होने पर ही सदस्यता पर विचार होगा।
फर्नीचर मामले पर पल्ला झाड़ा
कुर्सी-मेज गायब होने के आरोप पर अध्यक्ष ने कहा कि जब वह सदस्य ही नहीं हैं तो उनके सामान की जिम्मेदारी बार संघ की नहीं है। बार संघ सभी के लिए एक समान नियमों से काम करता है, किसी व्यक्ति विशेष के लिए अलग व्यवस्था नहीं हो सकती।
फिलहाल दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। सच्चाई बार के सदस्यता रजिस्टर और दस्तावेजों की जांच के बाद ही सामने आएगी।