Wednesday, August 12, 2026
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Parvez Alam

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विनाश के पाँच तोप: शिक्षा से तहसील तक

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विनाश के पाँच तोप: शिक्षा से तहसील तक  शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा, थाना और तहसील जैसे पाँच संस्थानों की विफलता गंभीर चिंता का विषय है। शिक्षा...

चौंच भर प्यास

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"चौंच भर प्यास" — चुपचाप मरते परिंदों की पुकार पर एक कविता कोई पानी रख दे, कटोरे में भरकर, मैं भी जी लूं ज़रा, इस तपते शहर...

कोई पानी डाल दे तो मैं भी चौंच भर पीलूं: चुपचाप...

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कोई पानी डाल दे तो मैं भी चौंच भर पीलूं: चुपचाप मरते परिंदों की पुकार तेज़ होती गर्मी, घटते जलस्रोत और बढ़ती कंक्रीट संरचनाओं के...

प्राइवेट स्कूल का मास्टर: सम्मान से दूर, सिस्टम का मज़दूर

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चॉक से चुभता शोषण: प्राइवेट स्कूल का मास्टर और उसकी गूंगी पीड़ा। "प्राइवेट स्कूल का मास्टर: सम्मान से दूर, सिस्टम का मज़दूर" प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों...

“गोबर, गुस्सा और विश्वविद्यालय की गिरती गरिमा”

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"गोबर, गुस्सा और विश्वविद्यालय की गिरती गरिमा" गोबर का जवाब: जब शिक्षा की दीवारों पर गुस्सा पुता हो। दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों द्वारा क्लासरूम और प्रिंसिपल...

गिलहरी और तोता: एक लघु संवाद (आज सुबह लिखी गयी कविता)

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गिलहरी और तोता: एक लघु संवाद (आज सुबह लिखी गयी कविता) वट-वृक्ष की शीतल छाया में, बैठे थे दो प्राणी चुपचाप— एक चंचला चपल गिलहरी, दूजा हरा-पीला तोता आप। थाली...

“बदलते मौसम, टूटती औरतें”,”सूखे खेत, खाली रसोई और थकी औरतें”

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"बदलते मौसम, टूटती औरतें","सूखे खेत, खाली रसोई और थकी औरतें" गांव की औरतें, जलवायु की मार: बीजिंग रिपोर्ट की चेतावनी "पानी, पेट और पहचान की लड़ाई:...

जाति की जंजीरें: आज़ादी के बाद भी मानसिक गुलामी

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जाति की जंजीरें: आज़ादी के बाद भी मानसिक गुलामी आस्था पेशाब तक पिला देती है, जाति पानी तक नहीं पीने देती। कैसे लोग अंधभक्ति में बाबा...

“जयंती का शोर, विचारों से ग़ैरहाज़िरी””जयंती का शोर, विचारों से ग़ैरहाज़िरी”

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"जयंती का शोर, विचारों से ग़ैरहाज़िरी"  प्रियंका सौरभ हर चौक-चौराहे पर अब, सजती है एक माला, बाबा साहब की तस्वीरें, और सस्ती सी दीवाला। नेता भाषण झाड़ रहा...

बाबा साहेब की विरासत पर सत्ता की सियासत, जयंती या सत्ता...

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"जयंती का शोर, विचारों से ग़ैरहाज़िरी",  "मूर्ति की पूजा, विचारों की हत्या", "हाथ में माला, मन में पाखंड"  बाबा साहेब की विरासत पर...