Wednesday, August 12, 2026
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Parvez Alam

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सरकारी स्कूलों को बन्द करने की बजाय उनका रुतबा बढ़ाये।

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सरकारी स्कूलों को बन्द करने की बजाय उनका रुतबा बढ़ाये। भारत में सरकारी स्कूल सामाजिक समानता और शिक्षा के अधिकार के प्रतीक हैं, लेकिन बजट...

ज्योतिबा फुले: क्रांति की मशाल

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ज्योतिबा फुले: क्रांति की मशाल समर्पित—ज्योतिराव फूले, जिन्होंने समाज को आँखें दीं। -प्रियंका सौरभ धूप थी अज्ञान की, अंधकार था घना, उग आया फूले-सा एक सूर्य अनमना। ज्योति बनी...

ज्योतिबा फुले का भारत बनाना अभी बाकी है”

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(नया भारत और फुले का सपना) "ज्योतिबा फुले का भारत बनाना अभी बाकी है" फुले केवल उन्नीसवीं सदी के समाज सुधारक नहीं थे, बल्कि वे आज...

मोबाइल की कैद

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मोबाइल की कैद मोबाइल ने छीन ली, हँसी-खुशी की बात। घर के भीतर भी नहीं, दिल से कोई साथ।। पिता लगे संदेश में, माँ का व्यस्त है...

मीडिया, स्त्री और सनसनी: क्या हम न्याय कर पा रहे हैं?

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मीडिया, स्त्री और सनसनी: क्या हम न्याय कर पा रहे हैं? "धोखे की खबरें बिकती हैं, लेकिन विश्वास की कहानियाँ दबा दी जाती हैं —...

कोचिंग इंडस्ट्री की मनमानी: अभिभावकों और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़

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ALLEN Career Institute, हिसार प्रकरण पर एक सख्त सवाल हिसार स्थित ALLEN Career Institute पर अभिभावकों ने आरोप लगाए हैं कि संस्थान ने उनके बच्चों...

किसी को उजाड़ कर बसे तो क्या बसे

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किसी को उजाड़ कर बसे तो क्या बसे (हैदराबाद के जंगलों की व्यथा) कभी थे ये हरियाली के गीत, जहाँ पंछियों की थी मधुर प्रीत। पेड़ों की छाँव...

रिश्तों की चिता..

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रिश्तों की चिता.. कभी एक आँगन था... जहाँ माँ की साड़ी की ओट में दुनिया छुप जाया करती थी। अब उसी आँगन में, “सीमा रेखा” खींची गई है... जमीनी नक्शे...

जंगलों पर छाया इंसानों का आतंक: एक अनदेखा संकट

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जंगलों पर छाया इंसानों का आतंक: एक अनदेखा संकट हाल ही में एक प्रमुख अखबार की हेडलाइन ने ध्यान खींचा—“शहर में बंदरों और कुत्तों का...

टैरिफ और वैश्विक व्यापार में परिवर्तन

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टैरिफ और वैश्विक व्यापार में परिवर्तन टैरिफ, यानी व्यापार शुल्क, वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण आर्थिक उपकरण है। हाल के वर्षों में,...