SIDHARTHNAGAR NEWS: (ओज़ैर खान) जनपद की समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर, कालजयी बौद्ध विरासत और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ी साहित्यिक उपलब्धि दर्ज हुई है। देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में रविवार को आयोजित एक भव्य समारोह में उत्तर प्रदेश सिविल सेवा के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. ज्ञान प्रकाश तथा जानी-मानी लेखिका एवं शिक्षाविद् अलका पांडेय द्वारा संयुक्त रूप से लिखित दो महत्वपूर्ण पुस्तकों—‘सिद्धार्थनगर: इतिहास के पन्नों से वर्तमान तक’ एवं ‘बुद्धपथ: विरासत से वर्तमान तक’ का गरिमामयी विमोचन संपन्न हुआ। समारोह में मुख्य रूप से हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि महाराज, हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष उषा प्रियदर्शिनी, हरियाणा की पूर्व कैबिनेट मंत्री कविता सुरेंद्र कुमार जैन, केंद्रीय सूचना आयुक्त सुश्री सुधा रानी रेलंगी, अंतरराष्ट्रीय पहलवान व ओलंपियन योगेश्वर दत्त, बौद्ध धर्मगुरु श्री श्री श्री 1008 जगद्गुरु लामा घ्याछो रिनपोछे तथा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार ब्यूरो संगठन के अध्यक्ष देवेंद्र पाठक सहित कई गणमान्य जन मौजूद रहे। अपर जिलाधिकारी एवं नोडल अधिकारी धर्मार्थ कार्य विभाग डॉ. ज्ञान प्रकाश ने पुस्तक ‘सिद्धार्थनगर: इतिहास के पन्नों से वर्तमान तक’ पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस कृति में जनपद के ऐतिहासिक, पुरातात्विक, भौगोलिक और सामाजिक पहलुओं को विस्तार से संजोया गया है। विश्व प्रसिद्ध कालानमक चावल, ऐतिहासिक पिपरहवा स्तूप, बौद्ध कालीन अवशेषों व संग्रहालय के साथ-साथ जिले में शिक्षा, उद्योग और पर्यटन के विकास की भावी संभावनाओं को रेखांकित किया गया है। यह पुस्तक जनपद के अतीत, वर्तमान और भविष्य का संपूर्ण आईना है। वहीं, यूजीसी नेट के क्षेत्र में मार्गदर्शन देने वाली विदुषी अलका पांडेय ने ‘बुद्धपथ: विरासत से वर्तमान तक’ के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यह पुस्तक तथागत बुद्ध के करुणा, शांति और धम्म संदेश को केंद्र में रखकर सिद्धार्थनगर के सांस्कृतिक सरोकारों को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाने की एक विनम्र पहल है। लेखकों का उद्देश्य कपिलवस्तु की पावन भूमि की विरासत को अभिलेखों से निकालकर आम जनमानस की स्मृति में जीवंत करना है। विमोचन के दौरान केंद्रीय सूचना आयुक्त सुधा रानी रेलंगी व बौद्ध धर्मगुरु लामा घ्याछो रिनपोछे ने लेखकों के शोधपरक दृष्टिकोण की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि भारत-नेपाल की साझी बौद्ध विरासत और सिद्धार्थनगर के गौरव को आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजना एक ऐतिहासिक कार्य है। ज्ञानस्थली पब्लिकेशन, लखनऊ द्वारा प्रकाशित ये दोनों पुस्तकें शीघ्र ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सुलभ होंगी। समारोह में देश-प्रदेश के कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, साहित्यकार व प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।







