मौला सज्जाद की याद में रोया हर अज़ादार
MIRZAPUR NEWS: (शाहिद वारसी) 26 मोहर्रम रविवार की देर रात स्टैंन्डर्ड न्यूज़ कार्यालय स्थित मरहूम एस. तनवीर रज़ा के अज़ाखाने में शहीद-ए-कर्बला हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के बेटे हज़रत इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम की शहादत की याद में मजलिस का एहतमाम किया गया। मजलिस के समापन के बाद शबीहे ताबूत बरामद हुआ। यह आयोजन रोहन रज़ा और फरहान रज़ा की निगरानी में सम्पन्न हुआ। मजलिस को ख़िताब करते हुए मौलाना हसन रज़ा बनारसी ने इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम की ज़िंदगी और कर्बला के बाद उन पर गुज़री मुसीबतों का दर्दनाक बयान किया। उन्होंने कहा कि इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम वह अज़ीम हस्ती हैं जिन्होंने अपनी आंखों से कर्बला का वह दर्दनाक मंज़र देखा, जब उनके वालिद हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम, भाई, चाचा, रिश्तेदार और वफ़ादार साथियों को एक-एक कर शहीद कर दिया गया। कर्बला के बाद लगभग चालीस वर्षों तक इमाम सज्जाद हर वक्त अपने शहीदों को याद करके रोते रहे। उनकी आंखों से आंसू ही नहीं, बल्कि खून तक बहने लगता था। कर्बला के बाद लगभग चालीस वर्षों तक इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम अपने अज़ीज़ों की याद में रोते रहें और ग़म-ए-कर्बला उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बन गया। मौलाना ने कहा कि 25 मोहर्रम वह तारीख है जब दुनिया ने सब्र और इबादत की मिसाल, इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम को खो दिया। उन्होंने अपनी बीमारी के बावजूद कर्बला के पैगाम को जिंदा रखा और अहलेबैत के दुखों को दुनिया तक पहुंचाया। नफ़ीसुल रिज़वी ने कहा कि इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम वह इमाम हैं जिन्होंने अपने पूरे घराने को कर्बला में शहीद होते देखा, लेकिन सब्र का दामन कभी नहीं छोड़ा। उनकी मुक़द्दस ज़िंदगी इंसानियत को सब्र और कुर्बानी का पैग़ाम देती है।पेशख्वानी मोहम्मद काज़िम और मिजराब मिर्जापुरी ने की, जबकि सोज़ख़्वानी अहमद ने पेश की। नौहाख़्वां मिजराब मिर्जापुरी और मासूम रज़ा ने दर्दभरे नौहे पेश कर अजादारों को इस कदर गमगीन कर दिया कि हर आंख अश्कबार हो गई।और अज़ादारों की सिसकियां पूरे अज़ाखाने में सुनाई देने लगीं। मजलिस के समापन के बाद शबीहे ताबूत बरामद हुआ तो फिज़ा या हुसैन और हाय या सज्जाद की सदाओं से गूंज उठी। मिजराब मिर्जापुरी ने व ज़ैगम अली इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम पर आई मुसीबतों का दर्दभरा नौहा पेश किया, जिस पर अंजुमन-ए-हैदरी के अज़ादारों ने पुरसादारी करते हुए सीनाज़नी की। ताबूत को देखकर अज़ादार बिलख पड़े और पूरा माहौल ग़म-ए-सज्जाद में डूब गया। मजलिस की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन पाक से हुई। इस मौके पर बड़ी तादाद में अज़ादारों ने शिरकत कर हज़रत इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम की बारगाह में ख़िराज-ए-अकीदत पेश किया।







