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चातुर्मास 25 से, सभी शुभ कार्य चार माह रहेगा बंद 20 नवंबर देवउठनी एकादशी से शुरू होगे सभी शुभ कार्य

स्वामी ब्रह्मश्रम महराज, स्वामी शाडिल्य महराज, किन्नर अखाडा प्रमुख प्रो (डा) लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, स्वामी सरयूदास महराज आश्रम में करेगे चातुर्मास
PRAYAGRAJ NEWS: वर्ष 2026 में सनातन (हिंदू) धर्म का चातुर्मास 25 जुलाई 2026 (देवशयनी एकादशी) से शुरू होकर 20 नवंबर 2026 (देवउठनी एकादशी) तक रहेगा। इन चार महीनों के दौरान भगवान विष्णु (लक्ष्मीनारायण ) योगनिद्रा में लीन रहते हैं, जिसके कारण सभी शुभ और मांगलिक कार्य (जैसे विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश आदि) बंद रहते हैं। 20 नवंबर देवउठनी एकादशी से फिर सभी शुभ कार्य शुरू होगे। इस दौरान प्रमुख संत, महात्मा अपने आश्रमों में शिष्यों सहित निवास करते हुए भगवद भजन करेगे। संत, महात्माओं का मानना है कि भगवान लक्ष्मीनारायण जब योगनिद्रा में लीन रहते है तो सभी संत – महात्मा अपने आश्रमों चातुर्मास करते हुए भगवद भजन और संत सेवा करते है। वह इन चार महीनों अर्थात चातुर्मास में नाला, नदी पार नही करते है। आश्रमों में भगवद भजन करते हुए संत सेवा करते है।
अखिल भारतीय दण्डी सन्यासी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीठाधीश्वर स्वामी  ब्रह्मश्रम महराज हरियाणा के चरखी दादरी स्थित आश्रम में शिष्यों और बटुकों सहित चातुर्मास करेगे। जगदगुरू नारायणाचार्य स्वामी शाडिल्य महराज प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर धाम स्थित आश्रम में शिष्यों और बटुकों सहित चातुर्मास करेगे। किन्नर अखाडा के आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी  प्रो (डा) लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी महराज शिष्यों सहित दिल्ली स्थित आश्रम में चातुर्मास करेगे। राजस्थान के बीकानेर के राष्ट्रीय संत महामण्डलेश्वर स्वामी सरयूदास महराज बीकानेर स्थित आश्रम में बडी संख्या में संत और शिष्यों सहित चातुर्मास करेगे।