बढ़नी चाफ़ा में आयोजित ‘नगर की समस्या नगर में समाधान’ कार्यक्रम बना विवाद का केंद्र; जिलाधिकारी द्वारा विवादित पूर्व विधायक को पुष्पगुच्छ भेंट करने पर जनता और विपक्षी दलों में भारी आक्रोश
SIDHARTHNAGAR NEWS: जनपद के डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नगर पंचायत बढ़नी चाफ़ा में आयोजित एक प्रशासनिक चौपाल कार्यक्रम गुरुवार को उस समय बड़े सियासी विवाद में तब्दील हो गया, जब मंच पर प्रोटोकॉल के उल्लंघन का मामला खुलकर सामने आया। ‘नगर की समस्या नगर में समाधान’ के उद्देश्य से आयोजित इस सरकारी जन-सुनवाई कार्यक्रम में नगरवासियों की जनसमस्याएं सुनने के लिए जिला प्रशासन की पूरी टीम मौजूद थी, लेकिन इस दौरान प्रशासनिक मंच पर जनप्रतिनिधियों की गरिमा और तय नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया। कार्यक्रम के दौरान सामने आए दृश्यों में साफ देखा गया कि जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर द्वारा डुमरियागंज क्षेत्र के पूर्व भाजपा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह को मंच पर न केवल विशेष स्थान दिया गया, बल्कि उन्हें बकायदा पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित भी किया गया। सरकारी अमले द्वारा एक पूर्व विधायक को मुख्य अतिथि जैसी तरजीह दिए जाने के इस प्रशासनिक रवैये ने लोकतांत्रिक व्यवस्था और कार्यपालिका की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद स्थानीय जनता, समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों में तीव्र आक्रोश देखने को मिल रहा है। आम नागरिकों और राजनीतिक हलकों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र की कमान वर्तमान में जनता द्वारा चुनी गई निर्वाचित विधायक सैयदा खातून के हाथों में है, तो इस महत्वपूर्ण सरकारी चौपाल कार्यक्रम में उनकी अनुपस्थिति का क्या कारण है। क्या जिला प्रशासन द्वारा क्षेत्र की मौजूदा समाजवादी पार्टी की विधायक को इस जनहित के कार्यक्रम के लिए जानबूझकर आमंत्रित नहीं किया गया, या फिर सत्ता पक्ष के प्रभाव में आकर जानबूझकर विपक्ष के निर्वाचित जनप्रतिनिधि की घोर अनदेखी की गई। लोकतांत्रिक मर्यादा और शासन के तय नियमों के तहत किसी भी राजकीय या प्रशासनिक आयोजन में स्थानीय मौजूदा विधायक या सांसद को ही सर्वोच्च प्राथमिकता और प्रोटोकॉल दिया जाना अनिवार्य होता है, परंतु इस कार्यक्रम में उन समस्त स्थापित नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। मामले में एक और गंभीर पहलू पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह की विवादित राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर उठ रहा है। स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग और आम जनता का आरोप है कि पूर्व विधायक आए दिन अपने बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं और उन पर क्षेत्र में कथित तौर पर हिंदू-मुसलमान की राजनीति करने तथा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में, जनता की समस्याओं के समाधान के लिए बने एक निष्पक्ष प्रशासनिक मंच पर उन्हें आमंत्रित करना और जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी द्वारा उन्हें विशेष आदर दिया जाना प्रशासन की कार्यशैली को संदेहास्पद बनाता है। लोगों का कहना है कि जिस मंच का मुख्य उद्देश्य बिना किसी भेदभाव के आम नागरिकों की मूलभूत समस्याओं का निस्तारण करना था, उसे राजनीतिक तुष्टिकरण का केंद्र बना दिया गया, जो पूरी तरह अनुचित है। यह पूरा मामला अब केवल एक पुष्पगुच्छ देने या मंच साझा करने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने जनपद में नौकरशाही की निष्पक्षता और लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। विपक्ष और स्थानीय जागरूक जनता अब इस मामले पर जिला प्रशासन से आधिकारिक स्पष्टीकरण की मांग कर रही है कि वर्तमान क्षेत्रीय विधायक की इस कार्यक्रम से दूरी की असली वजह क्या थी और किस नियम के तहत एक पूर्व विधायक को सरकारी आयोजन में मुख्य कर्ता-धर्ता की भूमिका सौंपी गई। क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि यदि वास्तविक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को ही सरकारी तंत्र द्वारा दरकिनार किया जाता रहेगा, तो विपक्ष को मतदान करने वाली आधी से अधिक जनता की समस्याओं को यह प्रशासन कितना न्याय दे पाएगा, यह अपने आप में एक बड़ा यक्ष प्रश्न बन चुका है।







