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बेतवा की छाती पर राख का साम्राज्य, नदी के बीच बने टापू पर खेला गया क्रिकेट

बल्ला घुमाकर सरकार को चेतावनी, बेतवा बचाने की उठी मांग
JHANSI NEWS: पारीछा थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख के कारण बेतवा नदी के बीचों-बीच बने विशाल राख के टापू पर क्रिकेट मैच खेलकर बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा ने पर्यावरणीय संकट की ओर सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। मोर्चा का दावा है कि यह संभवतः देश का पहला मामला है, जब किसी नदी की मुख्य धारा में बने राख के टापू पर क्रिकेट खेला गया हो। मोर्चा अध्यक्ष भानू सहाय ने आरोप लगाया कि पारीछा थर्मल पावर प्लांट द्वारा वर्षों से कोयले की जली हुई राख और अन्य अपशिष्ट पदार्थों का उचित निस्तारण नहीं किया जा रहा है। इसके चलते बड़ी मात्रा में राख बेतवा नदी में जमा होकर टापू का रूप ले चुकी है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल नदी ही नहीं, बल्कि पारीछा बांध और पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। उन्होंने बताया कि राख का यह टापू इतना विशाल हो चुका है कि उस पर क्रिकेट मैच आयोजित किया गया और खिलाड़ियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। इसके अलावा नदी में ऐसे दो अन्य बड़े टापू भी मौजूद हैं, जो वर्तमान में पानी के नीचे हैं और जलस्तर घटने पर पूरी तरह दिखाई देने लगेंगे।
मोर्चा ने यह भी आरोप लगाया कि प्लांट की चिमनियों से उड़ने वाली राख के कारण आसपास के गांवों के लोग विभिन्न गंभीर बीमारियों से प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, नदी और बांध में बढ़ते प्रदूषण के बावजूद संबंधित विभागों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। भानू सहाय ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते बेतवा नदी और पारीछा बांध को बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में पारीछा से लेकर हमीरपुर तक हजारों गांवों में पेयजल और सिंचाई का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। इससे कृषि व्यवस्था प्रभावित होगी और बड़ी मात्रा में भूमि बंजर होने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा इस मामले को लेकर शीघ्र ही राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) का दरवाजा खटखटाएगा और बेतवा नदी तथा पारीछा बांध के संरक्षण के लिए हरसंभव कानूनी एवं जनांदोलनात्मक प्रयास करेगा। राख के टापू पर आयोजित क्रिकेट मैच में बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा की टीम और ग्राम पारीछा की टीम ने भाग लिया। कार्यक्रम के माध्यम से क्षेत्रवासियों ने बेतवा नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की मांग दोहराई।