FATEHPUR NEWS: शहर स्थित विद्या त्रिपाठी इंटर कॉलेज में बाल विवाह रोकथाम विषय पर एक महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद साहू ने की, जिसमें छात्राओं को बाल विवाह के दुष्परिणामों और उससे बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। गोष्ठी को संबोधित करते हुए राजेंद्र प्रसाद साहू ने कहा कि समाज में बाल विवाह के दो प्रमुख रूप देखने को मिलते हैं—एक, जब माता-पिता आर्थिक या सामाजिक कारणों से नाबालिग लड़कियों की शादी कर देते हैं और दूसरा, जब नाबालिग लड़कियां स्वयं निर्णय लेकर घर से निकलकर विवाह कर लेती हैं। उन्होंने बताया कि दोनों ही स्थितियों में बालिकाओं के शारीरिक, मानसिक, शैक्षिक और आर्थिक विकास पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल विवाह न केवल सामाजिक बुराई है, बल्कि यह कानूनन अपराध भी है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत इसमें शामिल लोगों को एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दो वर्ष तक की सजा हो सकती है। इस अवसर पर मानव तस्करी विरोधी इकाई के प्रभारी गजेंद्र सिंह ने कहा कि कई मामलों में गरीब परिवारों की लड़कियों को बहला-फुसलाकर बड़े शहरों में ले जाकर बेच दिया जाता है, जो एक तरह से जबरन विवाह का ही रूप होता है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी घटनाएं बालिकाओं के जीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर देती हैं। उन्होंने अपील की कि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिलने पर तुरंत 1098 या 112 नंबर पर कॉल कर सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। चाइल्ड हेल्पलाइन की जिला समन्वयक नीरू पाठक ने बताया कि जनपद में अब तक करीब 20 बाल विवाह रोके जा चुके हैं। कई मामलों में बालिकाओं ने खुद आगे आकर साहस दिखाया और अपने विवाह को रुकवाया। उन्होंने कहा कि बच्चों में बढ़ती जागरूकता के कारण बाल विवाह की घटनाओं में कमी आ रही है। उन्होंने एक बालिका का उदाहरण भी साझा किया, जिसे अपने विवाह को रुकवाने पर मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों को बाल विवाह रोकथाम की शपथ दिलाई गई। इस दौरान महिला शक्ति केंद्र की पूनम तिवारी, महिला थाना प्रभारी आशा पांडे, विद्यालय के शिक्षकगण एवं सैकड़ों छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।







