PRAYAGRAJ NEWS: एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक सास की कथित साजिश, क्रूरता और लालच के चलते उसकी ही बेटी का वैवाहिक जीवन बर्बाद हो गया। आरोप है कि महिला ने सुनियोजित तरीके से अपनी बेटी को उसके पति के खिलाफ भड़काया और अंततः झूठे आरोपों में दामाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। जानकारी के अनुसार, शादी के मात्र तीन-चार महीने बाद ही सास के दबाव और हस्तक्षेप के कारण रिश्तों में दरार आनी शुरू हो गई थी। आरोप है कि सास ने अपनी बेटी को इस तरह बहकाया कि उसने अपने पति की कोई भी बात न मानने की जैसे ठान ली हो। शुरुआत में ही पत्नी ने पति पर परिवार से अलग होने का दबाव बनाया और किचन तक अलग करवा दिया। इसके बाद सास लगातार अपनी बेटी को उकसाती रही कि वह अपने पति की कोई सेवा न करे—न खाना बनाए, न कोई जिम्मेदारी निभाए। आरोप है कि इसी के चलते पत्नी अपने पति को न नाश्ता देती और न भोजन। पति की स्थिति ऐसी हो गई कि वह मजबूरी में घर में मेड रखने को विवश हो गया और अपने अधिकांश काम स्वयं करने लगा। पति ने कई बार अपनी पत्नी को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह पूरी तरह अपनी मां के प्रभाव में थी। बताया जाता है कि पत्नी दिन-रात अपनी मां से फोन पर बात करती रहती थी और सास उसे बार-बार मायके आने के लिए उकसाती थी। सास कथित तौर पर यह भी कहती थी कि पति से पैसे लो और मायके चली आओ। इसी के चलते पत्नी का व्यवहार असामान्य हो गया—वह दो-तीन दिन ससुराल में रहती, फिर पति से पैसे लेकर मायके चली जाती। कुछ दिन बाद पैसे खत्म होने पर वापस आती और फिर वही क्रम दोहराती रहती। जब पति ने इस व्यवहार का विरोध किया तो सास ने साफ कह दिया कि “मेरी बेटी जहां चाहेगी वहीं रहेगी, तुम्हें बोलने का कोई अधिकार नहीं।” इतना ही नहीं, सास ने दामाद पर अपनी बुजुर्ग मां को घर से निकालने और वृद्धाश्रम भेजने का दबाव भी बनाया और कथित तौर पर धमकी दी कि ऐसा न करने पर उसकी बेटी ससुराल नहीं आएगी। इस पूरे घटनाक्रम से परेशान पति ने अपने वैवाहिक जीवन को बचाने के लिए पत्नी के मामा और अन्य रिश्तेदारों से भी संपर्क किया, लेकिन उसे कोई ठोस समर्थन नहीं मिला। परिवार के कुछ लोगों ने यह भी स्वीकार किया कि सास का स्वभाव पहले से ही ऐसा रहा है और वह किसी की नहीं सुनती।
मामले ने गंभीर मोड़ तब लिया जब सास के कहने पर बेटी ने अपने पति से अपने छोटे भाई के व्यवसाय के लिए बड़ी रकम की मांग की। पति द्वारा असमर्थता जताने पर पत्नी ने उसे अपनी मां से बात करने को कहा। आरोप है कि इसके बाद सास स्वयं दामाद के घर पहुंची। इस दौरान उसने दामाद और उसकी मां के साथ अभद्र व्यवहार किया, अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया और गंभीर धमकियां दीं। यह भी आरोप है कि उसने कहा कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो परिणाम गंभीर होंगे, और यदि पुलिस या न्यायालय का सहारा लिया गया तो झूठे मामलों में फंसा दिया जाएगा। बताया जाता है कि वह अपने पति, पुत्र तथा 7-8 अन्य लोगों के साथ रात में घर पहुंची थी, जिससे परिवार में भय का माहौल बन गया। जाते-जाते उसने कथित रूप से कहा कि “अब पैसे कोर्ट में ही देने पड़ेंगे।” इसके बाद दामाद के खिलाफ फैमिली कोर्ट में मुकदमा दायर किया गया, जिसमें आर्थिक मांगें भी शामिल बताई जा रही हैं। आरोप है कि सास ने अपनी बेटी को मायके में ही रोक लिया और दामाद पर लगातार दबाव, अपमान और प्रताड़ना का सिलसिला जारी रखा। साथ ही, वह दामाद की संपत्ति, आय और वेतन पर नियंत्रण चाहती थी। दामाद का कहना है कि उसने अपने वैवाहिक संबंध को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन सास के दबाव और पत्नी के कठोर व्यवहार के चलते वह असफल रहा। यह भी आरोप है कि पत्नी उसे बार-बार बदनाम करने की धमकी देती थी, जिससे वह सामाजिक प्रतिष्ठा बचाने के लिए उसकी मांगों के आगे झुकता रहा। स्थिति तब और बिगड़ गई जब मुकदमे का नोटिस जानबूझकर पति के कार्यालय भेजा गया, जिससे उसकी पेशेवर छवि को नुकसान पहुंचा। बताया जा रहा है कि लगातार मानसिक दबाव और प्रताड़ना के कारण उसे अपनी नौकरी तक छोड़नी पड़ी और वर्तमान में वह गंभीर मानसिक तनाव की स्थिति में है। मामले में यह भी आरोप है कि सास झाड़-फूंक और टोना-टोटका जैसे कृतियों में भी लिप्त है ,वहीं दामाद का कहना है कि उस पर भी इस प्रकार के प्रयास कई बार किए गए, लेकिन असफल रहने पर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया।
समाज में बदलते रुझानों पर उठे सवाल
इस घटना के संदर्भ में यह भी चर्चा सामने आ रही है कि पहले जहां महिलाओं के उत्पीड़न के मामले अधिक सामने आते थे, वहीं अब कुछ मामलों में कानून के कथित दुरुपयोग के आरोप भी देखने को मिल रहे हैं। हालांकि कि हर मामले की सच्चाई अलग होती है और जांच के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए। आज के समय में यह भी देखने को मिल रहा है कि कुछ मामलों में कानून के दुरुपयोग के आरोप लगते हैं और इसके चलते पुरुषों के उत्पीड़न की बातें भी सामने आती हैं। हालांकि यह एक व्यापक सामाजिक विषय है, जिसमें हर मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक होती है। इस प्रकरण में अब देखना यह होगा कि न्यायिक प्रक्रिया के बाद संबंधित पक्ष को न्याय मिल पाता है या नहीं।







