FATEHPUR NEWS: हसवा कस्बे में श्री 108 स्वामी नागा निर्वाण महाराज की असीम अनुकंपा से उनके तपोस्थली आश्रम में दो दिवसीय भव्य रामलीला का आयोजन किया गया। रामलीला के मंचन को देखने के लिए क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे, जहां दर्शकों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ लीला का आनंद लिया। देर रात रामलीला का शुभारंभ हुआ। मंचन के दौरान भगवान राम और लक्ष्मण गुरु के आदेशानुसार संध्या वंदन करते हैं। वहीं दूसरी ओर मिथिला नरेश राजा जनक द्वारा माता सीता के स्वयंवर का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश-विदेश के राजा-महाराजाओं को आमंत्रित किया जाता है। भगवान राम और लक्ष्मण भी अपने गुरु के साथ मिथिला नगरी पहुंचते हैं। सीता स्वयंवर में लंका के राजा रावण भी बिना निमंत्रण के पहुंच जाते हैं, जहां बाणासुर और रावण के बीच तीखा संवाद होता है, जिसे सुनकर दर्शकों को वीर रस की अनुभूति होती है। इसके बाद पेटू राजा के मंचन से दर्शकों को हास्य रस का आनंद भी मिला। स्वयंवर में उपस्थित सभी राजा-महाराजा भगवान शंकर के धनुष को उठाने का प्रयास करते हैं, लेकिन कोई भी उसे हिला तक नहीं पाता। अंत में गुरु की आज्ञा पाकर भगवान राम जैसे ही धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास करते हैं, शिव धनुष दो भागों में टूट जाता है। धनुष टूटते ही पूरा पंडाल “जय श्री राम” के जयकारों से गूंज उठता है और माता सीता भगवान राम को वरमाला पहनाती हैं। इसके बाद समिति के सदस्यों व श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती उतारी। धनुष टूटने की सूचना पाकर भगवान परशुराम मिथिला नगरी पहुंचते हैं। इस दौरान लक्ष्मण और परशुराम के बीच रोचक संवाद होता है, जिसे दर्शक बड़ी ध्यानपूर्वक सुनते हैं। अंत में भगवान राम, लक्ष्मण द्वारा कहे गए शब्दों के लिए क्षमा मांगते हैं। तब परशुराम भी पहचान लेते हैं कि राम साक्षात भगवान विष्णु के अवतार हैं और वे भी उनसे क्षमा याचना करते हैं। इसके साथ ही एक बार फिर “जय श्री राम” के जयकारे गूंज उठते हैं। आयोजन के संरक्षक अतुल कुमार तिवारी एवं होरी लाल तिवारी ने बताया कि श्री 108 स्वामी नागा निर्वाण महाराज की कृपा से दो दिवसीय रामलीला का भव्य आयोजन किया गया है, जिसमें गैर जनपदों के सुप्रसिद्ध कलाकारों ने मंचन किया। लीला के मंचन के दौरान संरक्षक, व्यवस्थापक व आयोजकों के साथ सहयोगी वीरेंद्र सिंह, शोभा सिंह, त्रिभुवन, सत्यम सिंह, अंकित सिंह सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।







