PRAYAGRAJ NEWS: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनाई के इज़राइल व अमेरीकी हमले में शहीद होने की खबर फैलते ही मुस्लिम इलाक़ों में शोक की लहर दौड़ गई।हर घर में उदासी छा गई।हर शख्स जहां ग़म में डूबा रहा वहीं भारत के ईरान में रह रहे अपनों की खैरियत न मिलने से बेचैन रहा।खबर के असर से दिल जहां बेचैन और बोझिल सा रहा वहीं आंखें अश्कबार रहीं।दरियाबाद स्थित दरगाह हज़रत अब्बास में मोमेनीन इलाहाबाद की ओर से ताज़ियती जलसा आयोजित करने के साथ दिवंगत आलेमेदीन विश्व शान्ति के रहनुमा हिम्मत और इस्तिक़ामत की मिसाल आयतुल्ला सैय्यद अली खामेनेई को खेराजे अक़ीदत पेश की गई।किसी ने महान योद्धा बताया तो किसी ने ज़ालिम हुकूमत के सामने कभी न झुकने वाले रहबर ए मोअज्जम की संज्ञा से नवाजा। मौलाना सैय्यद जव्वादुल हैदर रिज़वी ने बताया की रहबर ए मोअज्जम की 86 साल की उम्र थी लेकिन जज़्बा नौजवानों जैसा था उनके अन्दर दिल में शेर जैसा जोश तो लहू मे कर्बला की रवायत और आवाज़ में ऐसा असर की ज़ालिमों की नींद हराम हो जाती थी।मौलाना आमिरुर रिज़वी ने उनकी रहबरी का ज़िक्र करते हुए कहा की उनकी रहबरी सिर्फ सियासत तक नहीं थी वह एक अक़ीदा था एक हौसला था एक रौशनी था। मौलाना हसन रज़ा ज़ैदी ने कहा मौत तुम्हारे पास आए या तुम मौत के पास जाओ फर्क़ नहीं पड़ता अगर मंज़िल इज़्ज़त और हक हो।कहा आज हमने उन्हें जिस्मानी तौर पर खो दिया मगर यह सच है की ऐसे लोग मरते नहीं उनकी सोच उनका जज़बा ,उनका पैग़ाम ज़िन्दा रहता है। मौलाना ज़ीशान हैदर ने कहा हमें फख्र है की हमने ऐसेज्ञरहबर की रहनुमाई देखी।एक ऐसा रहबर जिसका वजूद ज़ालिमों के लिए क़यामत था।
जिसकी आंखों में सच्चाई थी लहजे में यक़ीन था और सीने में कर्बला का सब्र था
आज आंखें खून के आंसू रो रही हैं।संचालन अनीस अहमद जायसी ने किया
माहे रमज़ान के मौक़े पर ज़ियादातर लोग रोज़े से थे लेकिन करैली करैलाबाग़, दरियाबाद, रानी मण्डी, दायरा शाह अजमल, बख्शी बाजार, शाहगंज सहित शिया बहुल्य इलाकों में रहबर ए मोअज्जम की शहादत की खबर से चुल्हे नहीं जले। घर की महिलाओं ने उदासी माहौल में दुआ ए मग़फिरत की और बाज़ार से फल मंगवाकर सभी ने रोज़ा खोला।घरों में काले परचम लगाए गए तो लोगों ने काले कपड़े पहन कर ताज़ियती जलसे में शिरकत की।







