माघ मेला के ओल्ड जीटी रोड पर लगा है पीठाधीश्वर स्वामी शंकराश्रम महराज का शिविर
माघ मेला में 35 वर्ष से कर रहे है कल्पवास
कल्पवास करते हुए अन्नदान से अक्षय पुण्य की प्राप्ति: स्वामी शंकराश्रम
PRAYAGRAJ NEWS: माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर – 6 ओल्ड जीटी रोड पर हरियाणा के करनाल, घरौडा आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी शंकराश्रम महराज का शिविर लगा हुआ है। स्वामी शंकराश्रम महराज आज से 35 वर्ष पूर्व माघ मेला में आना शुरू किया था लेकिन उस समय शिविर में अन्न क्षेत्र के नाम पर सिर्फ 11 कप चाय बनती थी जिसका वितरण साधु – संतों और श्रद्धालुओं में किया जाता था लेकिन धीरे – धीरे अब अन्न क्षेत्र व्यापक रूप लें लिया है। शिविर में पौष पूर्णिमा से लेकर माघी पूर्णिमा तक जलपान और विशाल भण्डारा दिन, रात चलता है जिसमें हजारों साधु, श्रद्धालु आस्था और श्रद्धा के साथ प्रसाद ग्रहण करते है। शिविर के व्यावस्थापक पीठाधीश्वर स्वामी शंकराश्रम महराज है। उन्होंने बताया कि पिछले 35 वर्षों में माघ मेला स्वरुप व्यापक स्तर पर बदल गया है, माघ मेला का क्षेत्रफल, बसावट और सुविधाएं माडर्न होती जा रही है लेकिन सबसे बडी बात यह है कि देश, विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और स्नानार्थियों के लिए चलने वाले अन्न क्षेत्रों का स्वरूप भी व्यापक हो गया है। मेला क्षेत्र में चलने वाले अन्न क्षेत्र में लाखों श्रद्धालु परिवार और साथियों के साथ दिन, रात खाना खाते है। पीठाधीश्वर स्वामी शंकराश्रम महराज ने बताया कि अन्न क्षेत्र चलने से मेला क्षेत्र में देश, विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और स्नानार्थियों को जलपान और खाने की असुविधा नही होती है और ना उनको परेशान होना पडता है। उन्होंने कहा कि तीर्थराज प्रयागराज में माघ मास में कल्पवास करते हुए अन्नदान से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
संत – महात्मा पहुंच रहे एक-दूसरे के शिविर, लें रहे कुशलक्षेम
पमाघ मेला में देश के कोने -कोने से शिविर लगाकर कल्पवास करने संत, महात्मा अब एक, दूसरे के शिविर में जाकर कुशलक्षेम पूछ रहे है। इससे भी सनातन की शाखाएं मजबूत हो रही है। मंगलवार को प्रयागराज के धर्मगुरू स्वामी रंजीत मिश्रा महावीर मार्ग पर लगे जगदगुरू स्वामी संतोषाचार्य महराज सतुआ बाबा के शिविर पहुंचे। धर्मगुरू स्वामी रंजीत मिश्रा ने जगदगुरु स्वामी संतोषाचार्य महराज सतुआ बाबा, स्वामी भैरवनाथ महराज सहित अन्य संतों से भेटकर कुशलक्षेम जाना और अंगवस्त्रम भेट कर सम्मानित किया। इसी प्रकार से धर्मगुरू रंजीत मिश्रा अन्य प्रमुख सतों के शिविर में गये और उनका कुशलक्षेम पूछते हुए सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह प्रयागराज की परंपरा रही है जो चली आ रही है, सभी लोग उसी का पालन करते है.







