उत्तर प्रदेश के आमजन की वस्तुओं, मध्यमवर्ग व निम्नवर्ग की वस्तुओं खानपान/चिकित्सा की वस्तुओं, आवश्यक वस्तुओं, गरीबों की वस्तुओं, पढ़ाई लिखाई की वस्तुओं व बीमा आदि में या तो करमुक्त कर दिया गया है या फिर कर की दर को घटाकर बड़ी राहत दी गई है।कुछ कर की दरों को समाप्त भी कर दिया गया है।
जी०एस०टी० की दरों में कमी करते हुए 12 प्रतिशत व 28 प्रतिशत के स्लैब को समाप्त कर 5 प्रतिशत व 18 प्रतिशत की दर का मुख्य स्लैब रखा गया है।5 प्रतिशत कर की दर से करमुक्त किया गया- छेना, पनीर, पिज्जाब्रेड, खाखरा, सादी रोटी. यूटीएच मिल्क आदि। 12 प्रतिशत कर की दर से करमुक्त किया गया इक्सरसाईज बुक, नोट बुक, पेसिंल, सारपेनर, मैप आदि।
पराठा एण्ड अदर इण्डियन ब्रेड, 18 प्रतिशत कर की दर से करमुक्त किया गया। इण्डियन ब्रेड, स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा सेवा आदि।18 प्रतिशत कर की दर से 5 प्रतिशत किया गया चीज, बटर, कॉन्डेन्सङ मिल्क. कतिपय ड्राई फ्रूट, कतिपय दवाएं, शिल्ड मछली व मीट, नमकीन, भुजिया, 20 लीटर का पानी का बोतल, टॉफी, कृषि यन्त्र, ट्रैक्टर का टायर, ट्युब व
एसेसरीज,फर्टिजाईजर, हेयर ऑयल, शैम्पू टूथ पेस्ट, सोप आदि।12 प्रतिशत कर की दर 5 प्रतिशत किया गया बायोपेस्टीसाईड, सोलर कुकर व अन्य उपकरण, बायोगैस प्लान्ट, सिलाई व सभी प्रकार का धागा, सिलाईमशीन, कारपेट व अदर टेक्सटाइल्स, रजाई, दरी, अधिकतर दवाएं, सर्जिकल गुडस, ज्यामेट्री बोक्स, टुथपाउडर, कैन्डिल, हैण्ड बैग, किचेन वेयर, हाउसहोल्ड ऑर्टिक्ल, किचेन ऑर्टिक्ल, फर्नीचर, साइकिल, रू0 2500 तक फुटवियर व रेडीमेड गारमेन्ट आदि।
28 प्रतिशत कर की दर 18 प्रतिशत किया गया तिपहिया वाहन, मोटरकार 1500 सीसी तक, मोटरव्हीकल 10 से अधिक सवारी वाले, माल वाहक मोटरव्हीकल, मोटरसाईकिल 350 सीसी तक एवं समस्त मोटर एसेसरीज, सीमेन्ट, एसी, टी०वी०, डिशवॉसर आदि
उपभोक्त > आमजन के उपभोग की अधिकांश वस्तुओं को 5 प्रतिशत के स्लैब में रखा गया है।
पूर्व में बचे हुए स्टाक पर बदली हुई दर से सप्लाई करना होगा ।
कार्बोनेटेड ब्रेवरेज (फ्रूट ड्रिंक), कोयला पर कर दी दर बढ़ाया गया क्योंकि compensation cess को समाप्त कर दिया गया है। कर की दर को नेशनलाइज किया गया है ।
एग्रीकल्चर मशीनरी, दवाइयों को करमुक्त क्यों नहीं किया गया है?
रॉ मैटेरियल पर जीएसटी का भुगतान करके मंगाया जाता है। यदि उक्त की आईटीसी प्राप्त नहीं होती है तब आईटीसी को रिवर्स करना पड़ेगा। इससे माल (वस्तु) की निर्माण कास्ट बढ़ जायेगी और निर्मित माल उपभोक्ता को अधिक दाम पर मिलेगा







