PRAYAGRAJ NEWS: करैली के साठ फिट रोड पर चल रहे नाज़ की रसोई की संचालिका डॉ नाज़ फात्मा द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई रील में भोजन करते हुए झारखंड के धनबाद वासेपुर का अट्ठावन वर्षीय मोहम्मद रियाज़ अंसारी को फोकस करते हुए एक रील ने रियल लाईफ को एक सूकून पहुंचाने का कार्य किया और प्रयागवासीयों को गौरव की अनुभूति की मिसाल भी बनी।नाज़ हास्पिटल के पूर्व मैनेजर सैय्यद मोहम्मद अस्करी के अनुसार गत पंद्रह मई को नाज़ की रसोई में डॉ नाज़ फात्मा लोगों को दिन का खाना परोस रही थीं।उसी में एक शख्स भी खाना लेकर खाते हुए उनके सहयोगी द्वारा बनाई जा रही रील में खास तौर पर क़ैद हो गया और यहीं से दो वर्ष पूर्व झारखंड से खोए परिवार को उसका अपना मिल गया।हुआ यह कि २५ अप्रैल २०२४ को झारखंड के धनबाद वासेपुर से ५८ वर्षीय मोहम्मद रियाज़ अंसारी जो मंद बुद्धि के हैं वह उत्तर प्रदेश की किसी ट्रेन पर सवार हो गए और प्रयागराज पहुंच गए।और यहीं करैली में किसी जगहां पर दो साल तक लावारिस की तरहां गुज़र बसर करते रहे।इसी बीच नाज़ की रसोई में पहुंच कर खाना खाते हुए वायरल हो गए।उधर इस रील को वृद्ध के परिजनों ने देखा तो डॉ नाज़ फात्मा से संपर्क किया और रविवार की देर रात प्रयागराज आकर उनको अपने साथ ले गए।हालांकि वृद्ध मंद बुद्धि के होने के बावजूद झारखंड से आए अपने सगे भाई मोहम्मद इम्तियाज और मोहम्मद मुश्ताक़ को देख कर लिपट गए और नाम लेकर पहचान भी गए वहीं उनके भांजे महताब आलम भतिजे मोहम्मद मेराज को भी वृद्ध ने पहचान लिया।ऐसे एक रील ने खोए हुए परिवार को मिला दिया।वहीं वृद्ध के परिजन जहां बहुत खुश नज़र आए वहीं डॉ नाज़ फात्मा और प्रयागराज वासियों के स्नेह और सम्मान देने के तरीक़े की सराहना करते नहीं थके।कहा वाक़ई में प्रयागराज के लोग बोहोत अच्छे हैं।यहां के लोगों में मानवता देखने को मिली जो यादगार रहेगी।







