JAUNPUR NEWS: राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की स्मृति में रविवार को कलेक्ट्रेट स्थित प्रेक्षागृह में “सामाजिक समरसता में गोरक्षपीठ की भूमिका” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं समरसता सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 22 लोगों को “समरसता सम्मान” से सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि प्रदेश सरकार के खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि गोरक्षपीठ केवल आध्यात्मिक केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का सशक्त माध्यम रहा है। यहां से दिए गए संदेश को समाज में व्यवहारिक रूप से लागू किया गया है। विशिष्ट अतिथि विधान परिषद सदस्य बृजेश सिंह ने कहा कि गोरक्षपीठ ने हमेशा सनातन धर्म को मजबूत करने के साथ समाज को जोड़ने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की मिसाल पेश की है। उन्होंने लोगों से समाज को तोड़ने वाली शक्तियों का विरोध करने का आह्वान किया।
पूर्व सांसद एवं पूर्व एमएलसी विद्यासागर सोनकर ने कहा कि भगवान राम और कृष्ण ने सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का संदेश दिया। सामाजिक समरसता के बिना सनातन धर्म की कल्पना अधूरी है। इसी भावना से भारत पुनः विश्वगुरु बन सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक रामशीष ने कहा कि जातियों में बंटे समाज को पुनः एकसूत्र में बांधने के लिए नए सामाजिक सूत्रों की आवश्यकता है। गुरु रविदास जन्मस्थान, वाराणसी के आचार्य भारत भूषण जी महाराज ने कहा कि ‘तेरे-मेरे’ की भावना से ऊपर उठकर ही राष्ट्र निर्माण संभव है।बारीनाथ मठ के महंत योगी हरदेवनाथ जी महाराज ने कहा कि समरसता का अर्थ त्याग, अपनत्व और वंचित वर्गों को साथ लेकर चलना है। कार्यक्रम का आयोजन ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन ने किया। संस्था के संस्थापक शशि प्रकाश सिंह ने विषय प्रवर्तन किया, जबकि संचालन श्याम चंद्र श्रीवास्तव ने किया। समारोह के दौरान 22 विभूतियों को समरसता सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पूर्व विधायक सुरेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. सूर्य प्रकाश सिंह, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह, डॉ. कुंवर शेखर, विजय गुप्ता, पंकज त्रिपाठी, सुरेश सिंह, पवन कुमार, शिवकुमार चौबे शास्त्री समेत बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।







