एमपीवीएम में छात्रों के लिए भारतीय ज्ञान परम्परा पर आधारित व्याख्यान सत्र संपन्न
PRAYAGRAJ NEWS: महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर (एमपीवीएम) तेलियरगंज में भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित ऊर्जा वान एवं प्रेरणा प्रद व्याख्यान सत्र का आयोजन आज किया गया । व्याख्यान सत्र के मुख्य प्रवक्ता’ अनादि फाउंडेशन’ के सह-संस्थापक सिद्धयोगी श्री आदिनारायणन जी महर्षि अगस्त्य तथा महावतार बाबाजी की परंपरा से जुड़े हैं। विद्यालय के कोषाध्यक्ष रवीन्द्र गुप्ता ने स्वामी जी को अंगवस्त्र एवं पौध समर्पित कर अभिनंदन एवं स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के सांस्कृतिक विधि विधान एवं राम भजन ‘पायो जी मैंने राम रतन धन पायो’के सुमधुर स्वर लहरियों से हुआ। विद्यालय की सचिव डॉ. कृष्णा गुप्ता, कोषाध्यक्ष रवीन्द्र गुप्ता, विद्यालय प्रबंध समिति की सम्मानित सदस्या एवं विद्यालय निदेशक श्रीमती रेखा वैद, प्रधानाचार्या श्रीमती अल्पना डे, विद्यालय प्रभारी श्रीमती गोपा भट्टाचार्या एवं वरिष्ठ शिक्षक- शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। आईआईटी दिल्ली के एनआरसी वीईई में ‘एडजंक्ट प्रोफेसर ऑफ़ प्रैक्टिस’ के तौर पर योग और वेदांत के आचार्य,गहन योग अभ्यास और तकनीकी विशेषज्ञ आदि नारायण जी ने बच्चों को भारतीय ज्ञान परंपरा की विशेषताओं से अवगत कराते हुए
सिद्धयोगी श्री आदिनारायणन जी ने कहा कि हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा आध्यात्मिक ज्ञान और आधुनिक शैक्षणिक ढांचे के बीच की दूरी में सामंजस्य स्थापित करने में सक्षम हैं। अपनी विशिष्ट एवं रोचक शैली में आपने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन एवं क्रियात्मक गतिविधियों के माध्यम से भारतीय सनातन संस्कृति ज्ञान के प्रामाणिक एवं साक्ष्यगत सिद्धांतों को ज्योतियीय गणना, वैज्ञानिक एवं गणितीय अवधारणाओं को सरलतम ढंग से समझाया। आपने वैश्विक परिदृश्य में भारतीय योग, विज्ञान को सफलता का मूल बताया। भारतीय ज्ञान प्रणाली भारतीय उपमहाद्वीप में हजारों वर्षों से विकसित ज्ञान, विज्ञान कला और दर्शन की एक समृद्ध और निरंतर चलने वाली परंपरा है। यह वेदों, उपनिषदों और ऋषियों की परंपराओं पर आधारित है, जो सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक और समग्र जीवन शैली सिखाती है। प्रश्नोत्तरी सत्र के अन्तर्गत छात्रों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए सिद्धयोगी आदिनारायणन कहा कि भारतीय संस्कृति, धर्म एवं दर्शन को अनुभूत करने एवं उसे अपने जीवन में उतारने का प्रयास कर आप विश्व में विशिष्ट एवं सफल बन सकते हैं। विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती अल्पना डे ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विज्ञान एवं सनातन के मध्य सामंजस्य के द्वारा हम ज्ञान केंद्रित समाज की स्थापना तथा जीवन की सार्थकता को सिद्ध कर सकते हैं।
छात्रों के व्यक्तित्व विकास की दृष्टि से सम्पूर्ण सत्र सार्थक एवं उद्देश्यपूर्ण रहा।







