बांदा से सोनभद्र तक निकलेगी आदिवासी बचाओ यात्रा – राम कृपाल कोल
PRAYAGRAJ NEWS: धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा ने अंग्रेजी शासन और जमींदारी प्रथा के विरोध में आंदोलन खड़ा किया था। जिनके साथ लाखों लोग अपनी शहादत दे दिए थे। उन्होंने आदिवासी समाज के हक अधिकार जल जंगल और जमीन की रक्षा के लिए बिगुल फूंका था और शहीद हो गए थे। यह बातें कांग्रेस पार्टी के राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सुनील परमार ने मंगलवार को कोरांव बाजार के भागीरथी गेस्ट हाउस में आयोजित भगवान बिरसा मुंडा के शहादत दिवस कार्यक्रम को संबोधित करने के दौरान बतौर मुख्य अतिथि कही। पंचायती राज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सुनील परमार ने कहा कि आदिवासियों के हक और अधिकार तथा उनके जल जंगल जमीन के अधिकार को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर नीति तैयार कर लड़ाई लड़ जाएगी। कार्यक्रम आयोजक कांग्रेस नेता पूर्व विधायक रामकृपाल कोल ने संबोधित करते हुए कहा कि बिरसा मुंडा व टांटा भील के इतिहास को हमारे समाज को जानना बेहद जरूरी है। जिन्होंने हमें हमारा हक अधिकार दिलाया और अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हो गए। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में अगर हिम्मत है तो हमें बनवासी नहीं आदिवासी कहे, हम बनवासी नहीं आदिवासी हैं। आरएसएस और भाजपा हमें बनवासी कहकर हमारे हक और अधिकार को छीनने का काम कर रही है। बिरसा मुंडा के शहादत दिवस कार्यक्रम को संबोधित करने के दौरान पूर्व विधायक रामकृपाल कोल ने कहा कि आदिवासी समाज की रक्षा के लिए तथा उनके हक और अधिकार जल और जंगल जमीन को बचाने के लिए बांदा से लेकर सोनभद्र तक आदिवासी बचाओ यात्रा आज निकाली जाएगी। जिसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष से आह्वान किया कि इसकी रणनीति तैयार करें और हम आदिवासी समाज के लोगों के साथ उत्तर प्रदेश में इस यात्रा को लेकर अपने हक और अधिकार की लड़ाई लड़ने का काम करेंगे। कार्यक्रम को कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष अशोक सिंह पटेल, जिला उपाध्यक्ष आनंद प्रकाश उर्फ बबलू शुक्ला, पूर्व ब्लाक प्रमुख गायत्री प्रसाद तिवारी, ब्लॉक अध्यक्ष शंकर लाल कोल, ब्लॉक अध्यक्ष अरुण तिवारी, डॉ विजेंद्र करवाल, आदिम समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हंसराज कोल, रामनारायण मौर्य, डॉ रामप्रवेश कुशवाहा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य ललन सिंह पटेल, अनीता शुक्ला, कन्हैया लाल कोल, विनोद कोल, डॉ राजेश, आदि वक्ताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से श्रीकांत मिश्रा, इंद्रजीत, छोटेलाल, उदय राज, सूर्य बली कुशवाहा, कल्लू राम सचिव, विवेक कुमार, जंग बहादुर, शिवराम मौर्य, गुलाब शंकर, प्राणनाथ, केशव आदिवासी, दिनेश कुमार, रामकुमार सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन राम प्रवेश कुशवाहा ने किया।







