सीएचसी का काम शुरू होने से पहले ही शुक्रवार से इमरजेंसी, ओपीडी और लैब का ध्वस्तीकरण शुरू
SIDHARTHNAGAR NEWS: (ओज़ैर खान) जनपद के बढ़नी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में नए निर्माण की आड़ में चालू स्वास्थ्य सेवाओं को ही उजाड़े जाने का मामला प्रकाश में आया है। लगभग छह महीने पहले ही प्रशासनिक स्तर पर पहल कर लाखों रुपये की लागत से इस पूरे अस्पताल परिसर का कायाकल्प कराया गया था, ताकि मरीजों को बेहतर और साफ-सुथरा माहौल मिल सके। अभी उस मरम्मत और सुधार कार्य को पूरा हुए कुछ ही महीने बीते थे कि शुक्रवार से उसी संवर चुके हिस्से पर हथौड़े और सब्बल चलने लगे। बढ़नी पीएचसी को उच्चीकृत कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का रूप दिया जाना निश्चित तौर पर क्षेत्र के लिए एक अच्छी और जरूरी योजना है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि सीएचसी की नई इमारत या कोई नया ढांचा खड़ा होने से पहले ही शुक्रवार को उन मुख्य कमरों को जमींदोज करने का काम शुरू कर दिया गया जहाँ अस्पताल की धड़कन बसती थी। इसमें डॉक्टरों का वह ओपीडी कक्ष शामिल है जहाँ बैठकर प्रतिदिन सैकड़ों मरीज देखे जाते थे, साथ ही आपातकालीन स्थिति में गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार देने वाला इमरजेंसी वार्ड और जांचों के लिए बनी पैथोलॉजी लैब भी शामिल है। अब यह तर्क दिया जा रहा है कि इन सेवाओं को अस्पताल में ही यहाँ-वहाँ किसी तरह शिफ्ट कर दिया जाएगा, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नया निर्माण शुरू होने से पहले ही एक सुव्यवस्थित और चालू व्यवस्था को तोड़ देना सही कदम है। परिसर में चल रही चर्चाओं के अनुसार, नए निर्माण कार्य और आवागमन के लिए रास्ता बनाने की खातिर इस हिस्से को तोड़ा जा रहा है। ऐसे में यह गंभीर सवाल उठता है कि क्या कार्यदायी संस्था और तकनीकी जानकारों के पास इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था और क्या जिस हिस्से को अभी हाल ही में लाखों रुपये खर्च कर संवारा गया था, उसी ओपीडी, इमरजेंसी और लैब को ढहाकर ही रास्ता निकाला जाना जरूरी था। शुक्रवार से अचानक शुरू हुए इस ध्वस्तीकरण से रोजाना दूर-दराज से आने वाले मरीजों को भारी फजीहत और अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि सीएचसी बनने का स्वागत तो है, लेकिन बिना किसी पुख्ता अग्रिम व्यवस्था के पहले से चल रही बुनियादी सुविधाओं को तोड़ देना सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। इस पूरे मामले पर जब संबंधित जिम्मेदार से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने मामले पर टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया।







