असोथर पुलिस ने एक आरोपी को किया गिरफ्तार
FATEHPUR NEWS: असोथर थाना पुलिस ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी पहचान के आधार पर किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से बैंक से लाखों रुपये का ऋण प्राप्त कर धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार 10 मई 2026 को थाना असोथर क्षेत्र के ग्राम कुसुम्भी निवासी मान सिंह उर्फ लखन सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोगों ने उनके नाम से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज तैयार कर उनकी कृषि भूमि को बंधक दिखाते हुए बैंक ऑफ इंडिया की चौक शाखा, फतेहपुर से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से 13 लाख 6 हजार रुपये का ऋण प्राप्त कर लिया। आरोप है कि ऋण की राशि आपस में बांट ली गई। शिकायत के आधार पर थाना असोथर में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। जांच के दौरान एक आरोपी अजयपाल विश्वकर्मा पुत्र कालिका, निवासी ग्राम सोनवरसा, थाना गाजीपुर, जनपद फतेहपुर का नाम सामने आया। पुलिस के अनुसार उसने अपने आधार कार्ड में कूटरचित संशोधन कराकर वादी के नाम का दुरुपयोग करते हुए बैंक से फर्जी तरीके से ऋण प्राप्त करने की साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई। पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक के पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी थरियांव के नेतृत्व में असोथर पुलिस ने गुरुवार को आरोपी अजयपाल विश्वकर्मा (55) को गिरफ्तार कर लिया। आवश्यक विधिक कार्रवाई के बाद उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसकी पहचान सह-आरोपी कुक्कू दुबे उर्फ कंधई दुबे के माध्यम से अवध नारायण तिवारी और विष्णु कुमार उर्फ पुलुल्ली सिंह से हुई थी। आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से उसके आधार कार्ड में कूटरचित संशोधन कराकर उस पर वादी मान सिंह उर्फ लखन सिंह का नाम दर्ज कराया। इसके बाद वादी की कृषि भूमि और अन्य अभिलेखों का उपयोग कर बैंक ऑफ इंडिया की चौक शाखा से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ऋण स्वीकृत कराया गया। आरोपी ने स्वीकार किया कि ऋण स्वीकृत कराने के लिए उसने बैंक के आवश्यक प्रपत्रों और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे तथा फर्जी पहचान के आधार पर ऋण लेने की पूरी प्रक्रिया में शामिल रहा। उसने यह भी बताया कि ऋण की राशि में से उसे लगभग 70 हजार रुपये मिले थे, जबकि शेष धनराशि अन्य सह-आरोपियों ने आपस में बांट ली। पुलिस के अनुसार ऋण प्रकरण में सह-आरोपी कुक्कू दुबे उर्फ कंधई दुबे तथा अनुराग द्विवेदी गारंटर बने थे। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के आधार पर मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।







