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निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर खाद बेची तो दर्ज होगा मुकदमा: जिलाधिकारी

SIDHARTHNAGAR NEWS: जनपद में खरीफ 2026 के आगामी सीजन को दृष्टिगत रखते हुए किसानों को उर्वरकों की सुचारू व पारदर्शी आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट के मुख्य सभागार में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। जिलाधिकारी श्री शिवशरणप्पा जी.एन. की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में जिले के समस्त थोक व फुटकर उर्वरक विक्रेताओं सहित विभिन्न उर्वरक प्रदायदाता कंपनियों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। बैठक के दौरान माल गोदाम आपूर्ति बिंदु पर खाद की समयबद्ध उपलब्धता, वास्तविक समय पर प्राप्ति सूचना (एक्नॉलेजमेंट), पॉइंट ऑफ सेल (बिक्री बिंदु) मशीनों की क्रियाशीलता तथा उर्वरकों की मूल्य गणना जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण एजेंडा बिंदुओं पर गहन मंथन किया गया। इस दौरान विक्रेताओं के प्रतिनिधियों ने भी निर्धारित मूल्य पर बिक्री सुनिश्चित करने तथा गैर-अनुदानित उत्पादों की जबरन टैगिंग (सह-उत्पादों की अनिवार्य बिक्री) को प्रभावी ढंग से रोकने के संबंध में अपने सुझाव जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए। बैठक में जिला कृषि अधिकारी द्वारा खरीफ सीजन के अंतर्गत धान की नर्सरी और रोपाई की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जनपद में उर्वरकों के वर्तमान भंडार की स्थिति स्पष्ट की गई। उन्होंने अवगत कराया कि 10 जून 2026 तक जनपद में यूरिया 29932.331 मीट्रिक टन, डीएपी 6554.867 मीट्रिक टन, एनपीके 6876.778 मीट्रिक टन तथा एमओपी 552.166 मीट्रिक टन की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है, जिससे कृषकों को इस पूरे सीजन में किसी भी प्रकार की असुविधा या किल्लत का सामना न करना पड़े।
समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी थोक व फुटकर खाद विक्रेताओं को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी फुटकर विक्रेता अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर प्राथमिकता के आधार पर अनिवार्य रूप से क्लोज्ड सर्किट टेलीविजन (सीसीटीवी) कैमरे लगवाएं और अपनी दुकानों के बाहर उर्वरक की निर्धारित बिक्री दर तथा मिलने वाले सरकारी अनुदान का फ्लैक्स बैनर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि किसी भी परिस्थिति में कृषकों से निर्धारित मूल्य से अधिक राशि न वसूली जाए और न ही खाद के साथ किसी अन्य अवांछित उत्पाद को जबरन बेचा जाए। यदि आकस्मिक निरीक्षण के दौरान कोई भी विक्रेता अधिक मूल्य वसूली, कालाबाजारी या टैगिंग में संलिप्त पाया गया, तो उसके विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट (मुकदमा) दर्ज कराते हुए कठोर विधिक व दंडात्मक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।