LAKHIMPUR KHERI NEWS: गांव कैमहरा में श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास ने ध्रुव प्रसंग सुनाया। नैमिषारण्य धाम से पधारे आचार्य शिव प्रकाश मिश्रा ने सुनाया कि सुखदेव जी महाराज कथा सुनाते हुए परीक्षित जी से कहते हैं परीक्षित बचपन में भगवान की भक्ति करना बहुत आसान होता है जो बालकपन में भगवान की भक्ति करता है भगवान उस पर बहुत जल्दी द्रवित हो जाते हैं,इसी संदर्भ में ध्रुव जी की पावन कथा सुनाई। जिसमें कथा व्यास आचार्य शिव प्रकाश जी ने बताया श्रीमद् भागवत महापुराण के अनुसार एक बार की बात ध्रुव जी अपने पिता की गोदी में बैठे हुए थे इतने में ध्रुव जी की सौतेली मां ने ध्रुव जी का अपमान कर दिया उन्होंने कहा कि अगर पिता की गोदी में बैठना है सो जाओ तपस्या करो और फिर मेरे गर्भ में आकर के जन्म लो तब तुम पिता की गोदी और राजगद्दी पर बैठने के लायक होंगे। इस तरह से ध्रुव जी का अपमान किया और भगवान का अपमान किया ध्रुव जी रोते हुए आए और अपनी माता सुनीति को बताया, तब सुनीति ने ध्रुव जी को परमपिता परमात्मा की गोदी के बारे में बताया ध्रुव की तपस्या करने के लिए चले गए और भगवान की तपस्या की जिस भगवान की गोदी प्राप्त की और भगवान ने 36000 वर्षों तक आकंटक राज्य करने का वरदान दिया। यह प्रसंग सुन श्रोता मंत्र मुग्ध हो गए।







