VARANASI NEWS: प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी जगदगुरु आदि शंकराचार्य जयंती महोत्सव बडे धुमधाम व हर्षोऊल्र्लास के साथ महमूरगंज स्थित श्रृंगेरी शंकराचार्य मठ में मनाया गया। वैशाख शुक्ल पंचमी के दिन पूर्वान्ह श्रृंगेरी मठ के प्रबंधक चल्ला अन्नपुर्णा प्रसाद व उनके पुत्र चल्ला अभिनव ने पंडित श्रीकांत पाठक के आचार्यत्व में भगवान शंकर का रुद्राभिषेक व अष्टोत्तर महापूजा की।तत्पश्चात चारों वेदो के वैदिक ब्राह्मणो द्वारा वसंतपूजा की गयी।इस अवसर पर माणिक प्रभु संस्थान माणिक नगर, कर्नाटक के पीठाधिपति श्री सद्गुरु ज्ञानराज माणिक प्रभु महाराज का अद्वैत वेदांत के ऊपर प्रवचन हुआ। माणिकप्रभु महाराज ने काशी शब्द की व्याख्या करते हुए यह बतलाया कि इसी काशी में आदि शंकराचार्य जी महाराज का चाण्डाल रूपी शंकर जी के साथ संवाद हुआ और शंकराचार्य जी को भगवान् शिव का साक्षात्कार व आत्मबोध प्राप्त हुआ । कहा कि काशी आत्मज्ञान का बोध कराने वाली नगरी है। इस दौरान सद्गुरु माणिक प्रभु द्वारा काशी पंचकम् स्तोत्र तथा मनीषा पंचकम् स्तोत्र की व्याख्या प्रस्तुत की गयी। कार्यक्रम का संचालन माधव रटाटे ने व धन्यवाद श्रृंगेरी मठ के प्रबंधक चल्ला अन्नपुर्णा प्रसाद ने किया। अंत मे सभी भक्तों को महाप्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर पं श्रीकांत मिश्र,अनिल किंजवडेकर, संतोष सोलापुरकर, षडानन पाठक, यादव राव पाठक, सतीशचंद्र मिश्र, शिवदत्त द्विवेदी, नारायण शात्री, वी. सुंदरम शास्त्री, सुधीर मिश्र, आशुतोष ओझा, राहुल गोस्वामी सहित बडी संख्या में वेद अध्ययन करने वाले विद्यार्थी प्रमुख रुप से उपस्थित रहे।







