NEW DELHI NEWS: (अमरेश चंद्र पाण्डेय) गुमशुदगी के मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलने पर पुलिस को FIR दर्ज करने में अनावश्यक देरी नहीं करनी चाहिए। यह निर्देश गुमशुदा व्यक्ति की उम्र या लिंग के आधार पर अलग-अलग तरीके से लागू नहीं किया जा सकता। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने स्पष्ट किया कि गुमशुदगी की सूचना मिलने के बाद पुलिस को तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि गुमशुदगी के मामलों में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है और पुलिस की ओर से देरी होने पर जांच प्रभावित हो सकती है। कोर्ट के इस रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि गुमशुदगी की सूचना को केवल सामान्य शिकायत मानकर पुलिस तत्काल कार्रवाई से बच नहीं सकती। किसी व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलने पर पुलिस को मामले को गंभीरता से लेते हुए कानून के मुताबिक आवश्यक कार्रवाई करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि गुमशुदगी के मामलों में निर्देश को केवल बच्चों तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि तत्काल FIR दर्ज करने का निर्देश उम्र और लिंग से परे लागू होता है। यानी बच्चे, महिला, पुरुष या बुजुर्ग—किसी के भी लापता होने की सूचना मिलने पर पुलिस को तत्काल कार्रवाई करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश का उद्देश्य गुमशुदा लोगों की तलाश में पुलिस की कार्रवाई को तेज करना और शुरुआती स्तर पर होने वाली लापरवाही को रोकना है। कोर्ट के रुख से राज्यों और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी भी स्पष्ट हुई है कि गुमशुदगी की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और कानून के अनुरूप समय पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इस आदेश को गुमशुदगी के मामलों में पुलिस जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि किसी व्यक्ति के लापता होने की सूचना को हल्के में नहीं लिया जा सकता और पुलिस को ऐसी शिकायत पर तत्काल कानूनी प्रक्रिया शुरू करनी होगी।







