कछारी क्षेत्र में शकरकंद, लौकी, करेला, कोहड़ा, परवल, मिर्च व धान की फसलें डूबीं, हजारों रुपये का नुकसान
KAUSHAMBI NEWS: गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी से सिराथू तहसील क्षेत्र के तरसौरा, शहजादपुर और सुखऊ का पूरा गांव के कछारी इलाके में किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गंगा का पानी खेतों में पहुंचने से कछार में बोई गई सैकड़ों बीघे फसलें जलमग्न हो गई हैं। पानी भरने से शकरकंद, लौकी, करेला, कोहड़ा, परवल, मिर्च और धान समेत विभिन्न फसलों को भारी नुकसान हुआ है। फसलें डूबने से किसानों की लागत के साथ उनकी मेहनत भी पानी में डूब गई है। गंगा के किनारे कछारी क्षेत्र में हर साल बड़ी संख्या में किसान विभिन्न सब्जियों और अन्य फसलों की खेती करते हैं। कम लागत में अच्छी पैदावार होने की उम्मीद के चलते किसान इन फसलों में अपनी पूंजी लगाते हैं। इस बार भी किसानों ने बड़े पैमाने पर शकरकंद, लौकी, करेला, कोहड़ा, परवल, मिर्च और धान की खेती की थी। फसलें तैयार होने की ओर बढ़ रही थीं, लेकिन गंगा के जलस्तर में वृद्धि के बाद खेतों में पानी भर गया। कई स्थानों पर फसलें पूरी तरह पानी में डूब गई हैं। तरसौरा में छोटू ने चार बीघा में करेला, लौकी, शकरकंद और धान की फसल बोई थी। अंगद ने तीन बीघा तथा शिवमोहन ने दो बीघा में शकरकंद की खेती की थी। हरिओम ने दो बीघा में कोहड़ा और मनोज ने दो बीघा में कोहड़ा व परवल की फसल लगाई थी। राजकरण ने पांच बीघा में धान, शकरकंद और मिर्च की खेती की थी। इसके अलावा धर्मपाल ने पांच बीघा में शकरकंद, गुलाब ने दो बीघा, बनारसी ने तीन बीघा और गयाप्रसाद ने छह बीघा में फसल बोई थी। इन किसानों की फसलें भी गंगा के पानी की चपेट में आ गई हैं। इसी तरह शहजादपुर क्षेत्र में राजू ने दो बीघा में लौकी और करेला की फसल लगाई थी। अनीश ने एक बीघा में शकरकंद तथा रिजवान ने एक बीघा में लौकी और करेला की खेती की थी। गंगा का पानी खेतों में भरने से इन फसलों पर भी संकट खड़ा हो गया है। सुखऊ का पूरा गांव के कछारी क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में किसान प्रभावित हुए हैं। अजय पटेल, राजेंद्र पटेल, द्वारिका, गुलाब, गंगाधर, गंगासागर और गजाधर समेत अन्य किसानों ने शकरकंद, लौकी और अन्य फसलों की खेती की थी। जलस्तर बढ़ने के बाद खेतों में पानी भरने से फसलें डूब गई हैं। किसानों का कहना है कि कछार में खेती उनके लिए आय का महत्वपूर्ण साधन है। हर साल गंगा का जलस्तर बढ़ने पर खेतों में पानी भर जाता है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
हर साल पूंजी डूबने से बढ़ रही परेशानी किसानों के मुताबिक कछारी क्षेत्र में खेती करने के लिए बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और अन्य मदों में बड़ी रकम खर्च होती है। फसल अच्छी होने पर इसी से परिवार के खर्च और अगली फसल की तैयारी होती है। गंगा का पानी खेतों में पहुंचने के बाद फसल नष्ट होने से किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक ओर खेती में लगाई गई पूंजी वापस मिलने की उम्मीद खत्म हो गई है, वहीं दूसरी ओर अगली खेती के लिए भी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गंगा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण कछार क्षेत्र में खेती करने वाले किसानों को हर वर्ष नुकसान का सामना करना पड़ता है। किसानों ने प्रशासन से मौके पर टीम भेजकर प्रभावित खेतों का सर्वे कराने और फसल क्षति का आकलन कराने की मांग की है। किसानों को उम्मीद है कि सर्वे के बाद वास्तविक नुकसान सामने आने पर उन्हें शासन से नियमानुसार आर्थिक सहायता मिल सकेगी।
प्रशासन कराएगा फसल क्षति का सर्वे
एसडीएम प्रमेश श्रीवास्तव ने बताया कि गंगा का जलस्तर बढ़ने से किसानों की फसल का नुकसान हुआ है तो उसका सर्वे कराया जाएगा। यदि वास्तव में किसानों की फसल का नुकसान पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई कराते हुए शासन से फसल क्षति का सहयोग दिलाया जाएगा।







