FATEHPUR NEWS: खागा विधायक कृष्णा पासवान के योगी सरकार में मंत्री बनने के बाद जिले की राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। खासतौर पर पासवान (दलित) समाज के बीच उनकी बढ़ती स्वीकार्यता को भाजपा के लिए बड़ा अवसर माना जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कृष्णा पासवान अपने समाज को एकजुट कर भाजपा के पक्ष में मजबूत आधार तैयार कर पाएंगी?
राजनीतिक जानकारों की मानें तो भाजपा लंबे समय से दलित वोट बैंक में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। ऐसे में कृष्णा पासवान का मंत्री बनना सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। अगर वह अपने क्षेत्र और समाज में सक्रियता बढ़ाती हैं, तो इसका सीधा फायदा पार्टी को मिल सकता है। दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी का ‘पीडीए’ (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फार्मूला भी इसी वर्ग पर केंद्रित है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कृष्णा पासवान दलित मतदाताओं को सपा के इस समीकरण से अलग कर पाने में सफल होती हैं या नहीं। अगर ऐसा होता है, तो यह सपा के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। फतेहपुर जिले की सीटों पर भी इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह है और उम्मीद जताई जा रही है कि मंत्री बनने के बाद विकास कार्यों को गति मिलेगी, जिससे आगामी चुनाव में पार्टी को लाभ मिल सकता है। हालांकि, यह भी सच है कि सिर्फ पद मिलने से चुनावी जीत तय नहीं होती, बल्कि जमीनी काम और जनता से जुड़ाव ही असली कसौटी होता है। अब सबकी नजरें कृष्णा पासवान के अगले कदमों पर टिकी हैं कि क्या वह सामाजिक समीकरण साधते हुए भाजपा को मजबूत करेंगी, या विपक्ष अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल रहेगा?





