LAKHIMPUR KHERI NEWS: सीबीएसई बोर्ड का परिणाम आते ही एइबॉल पब्लिक स्कूल एक बार फिर सुर्खियों में छा गया है। विद्यालय के होनहार छात्र-छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सफलता का नया इतिहास लिख दिया है। बच्चों की इस उपलब्धि से न सिर्फ माता-पिता, बल्कि पूरा निघासन क्षेत्र गौरवान्वित हुआ है।इस वर्ष के परिणाम में विद्यालय के तीन विद्यार्थियों ने मेरिट में स्थान बनाकर स्कूल का परचम लहराया।मुकुल तिवारी ने 96 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विद्यालय में प्रथम स्थान हासिल किया। आचमन दीक्षित 95 प्रतिशत अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि अद्विक मौर्य ने 94.20 प्रतिशत अंक लेकर तीसरा स्थान प्राप्त किया। इनके अलावा विद्यालय के कई अन्य विद्यार्थियों ने भी 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।परिणाम घोषित होते ही विद्यालय परिसर में जश्न का माहौल बन गया।छात्र-छात्राओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी। अभिभावकों ने बच्चों को गले लगाकर आशीर्वाद दिया और विद्यालय के शिक्षकों का आभार जताया। विद्यालय के प्रधानाचार्य ने बताया कि यह सफलता विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत, नियमित दिनचर्या और अनुशासित जीवनशैली का परिणाम है। पूरे वर्ष बच्चों ने स्मार्ट क्लास, टेस्ट सीरीज और डाउट क्लास का पूरा लाभ उठाया। शिक्षकों ने भी प्रत्येक बच्चे पर व्यक्तिगत ध्यान दिया और कमजोर विषयों पर विशेष मेहनत कराई।टॉपर मुकुल तिवारी ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को दिया। मुकुल ने कहा कि वह प्रतिदिन 6 से 7 घंटे पढ़ाई करते थे। मोबाइल और टीवी से दूरी बनाकर केवल लक्ष्य पर ध्यान दिया। भविष्य में आईआईटी से इंजीनियरिंग करने का सपना है। वहीं दूसरे स्थान पर रहीं आचमन दीक्षित ने कहा कि शिक्षकों के नोट्स और समय-सारणी ने उन्हें सफलता दिलाई। वह डॉक्टर बनकर समाज सेवा करना चाहती हैं।विद्यालय प्रबंधन ने सभी सफल छात्र-छात्राओं, उनके अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई दी। प्रबंधन ने कहा कि यह सामूहिक प्रयास की जीत है। विद्यालय का उद्देश्य केवल अंक लाना नहीं, बल्कि बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है। खेल, संस्कार और अनुशासन के साथ पढ़ाई कराई जाती है, जिसका नतीजा आज सबके सामने है।प्रबंधन ने भरोसा दिलाया कि आने वाले सत्र में भी एइबॉल पब्लिक स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करता रहेगा। विद्यालय की लाइब्रेरी, लैब और डिजिटल क्लास को और बेहतर किया जाएगा, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।







