Home अमेठी शिक्षक समाज का निर्माता है:राज बहादुर दीक्षित

शिक्षक समाज का निर्माता है:राज बहादुर दीक्षित

AMETHI NEWS:  अमेठी क्षेत्र स्थित सरस्वती शिक्षा मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, ग्राम भारती (यूपी बोर्ड), परतोष अमेठी में विद्या भारती जन शिक्षा समिति, काशी प्रदेश द्वारा आयोजित चार दिवसीय प्रांतीय प्रधानाचार्य कार्ययोजना बैठक का शुभारंभ हुआ। यह कार्यशाला 18 अप्रैल 2026 से 21 अप्रैल 2026 तक आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम के द्वितीय दिवस के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में काशी प्रांत के प्रदेश निरीक्षक राज बहादुर दीक्षित उपस्थित रहे। उनके साथ मंच पर जिला मंत्री अमेठी ओंकार नाथ शुक्ला, जिला मंत्री सुल्तानपुर राम अकबाल द्विवेदी, सम्भाग निरीक्षक काशी वीरेंद्र सिंह, प्रयाग सम्भाग निरीक्षक कमलेश तथा सुल्तानपुर के सम्भाग निरीक्षक शेषमणि तिवारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती, ओम् तथा भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ, जिसके उपरांत सस्वर वंदना प्रस्तुत की गई। अतिथियों का परिचय सम्भाग निरीक्षक शेषमणि तिवारी द्वारा कराया गया। प्रधानाचार्य संतोष कुमार मिश्र एवं विवेक शर्मा ने अतिथियों का रोली, बैज एवं अंगवस्त्र से स्वागत किया। इस कार्ययोजना बैठक में जन शिक्षा समिति काशी प्रदेश के 13 जनपदों से आए लगभग 70 प्रधानाचार्य सहभागी बने हैं। वंदना सत्र में अपने मार्गदर्शन में प्रदेश निरीक्षक राज बहादुर दीक्षित ने कहा कि शिक्षक समाज का निर्माता होता है। शिक्षक व्यक्ति का निर्माण करता है, जिससे समाज का निर्माण होता है और अंततः राष्ट्र का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि हमारी शिक्षा व्यवस्था भारतीयता के आधार पर आधारित है और नई शिक्षा नीति (NEP-2020) में भी यह स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। अधिगम की व्यवस्था पंचपदीय पद्धति पर आधारित है तथा इसकी अंतिम इकाई हमारे आचार्य हैं। उन्होंने आगे कहा कि कक्षा-कक्षा की शिक्षण पद्धति पर हमें NEP-2020 के अनुरूप विचार करना होगा। साथ ही विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को विद्या भारती से जोड़ने का प्रयास किया जाना चाहिए। पंच परिवर्तन के अंतर्गत सामाजिक दायित्व बोध, नागरिक कर्तव्य, भाई-बहनों में सेवा भाव तथा स्वदेशी भावना को विकसित करना आवश्यक है। हमारा खान-पान, पहनावा और व्यवहार स्वदेशी होना चाहिए। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार, नवीन शिक्षण पद्धतियों का आदान-प्रदान तथा प्रबंधन कौशल का विकास करना है। इस दौरान विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य अपने अनुभव साझा कर रहे हैं और समसामयिक शैक्षिक विषयों पर चर्चा कर रहे हैं।
कार्यक्रम के अंतर्गत विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान, समूह चर्चा एवं प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रतिभागियों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली की नई दिशाओं की जानकारी प्राप्त होगी। साथ ही सभी प्रधानाचार्य अपने-अपने विद्यालयों की वार्षिक कार्ययोजना प्रस्तुत करेंगे।