PRAYAGRAJ NEWS: किसानों की जमीन, वन भूमि और पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (संगम) ने शनिवार को बारा तहसील में जोरदार प्रदर्शन करते हुए राज्यपाल के नाम 18 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन उपजिलाधिकारी बारा को सौंपा। संगठन ने वन विभाग पर किसानों की भूमिधरी भूमि पर अवैध हस्तक्षेप, हरे पेड़ों की कटान, अवैध खनन को संरक्षण देने और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। यूनियन का कहना है कि ग्राम जूही में किसानों की निजी भूमि पर वन विभाग ने गलत तरीके से कंटूर ट्रेंच (गड्ढे) खुदवा दिए हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। संगठन ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने और किसानों की भूमि को तत्काल मुक्त कराने की मांग की है। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि बारा और शंकरगढ़ क्षेत्र में संचालित सोलर प्लांट, उद्योग, सीमेंट फैक्ट्रियां और खनन परियोजनाएं पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी कर रही हैं। इसके बावजूद वन विभाग और संबंधित एजेंसियां प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही हैं। संगठन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। किसान नेताओं ने सहकारी समितियों में खाद-बीज की कालाबाजारी, फर्जी आरा मशीनों के संचालन, सार्वजनिक मार्गों पर अतिक्रमण तथा वृक्षारोपण योजनाओं में अनियमितताओं की भी जांच कराने की मांग उठाई। इसके अलावा महर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन स्मृति वन के सौंदर्यीकरण, गढ़वा-डेराबारी वन क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने और गोरखा क्षेत्र की प्रस्तावित सड़क का निर्माण शीघ्र पूरा कराने की मांग भी की गई। भारतीय किसान यूनियन (संगम) ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन किसानों के हित में व्यापक आंदोलन शुरू करने को बाध्य होगा।यह संस्करण अखबार में प्रमुख खबर के रूप में प्रकाशित करने योग्य शैली में तैयार किया गया है।







