पांच सदस्यीय राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर टीम देगी प्रशिक्षण, कक्षा-कक्षों को बनाया जाएगा आनंदमयी और दक्षता-केंद्रित
KAUSHAMBI NEWS: जिले में प्रारंभिक शैशव देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) को और प्रभावी बनाने की दिशा में बाल वाटिका और आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य नौनिहालों को खेल-खेल में सीखने का अवसर प्रदान करते हुए उनमें भाषा, संज्ञानात्मक क्षमता और जीवन कौशल का विकास करना है। प्रशिक्षण के माध्यम से आंगनबाड़ी ईसीसीई एजुकेटरों, प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों व शिक्षकों को बाल-केंद्रित और गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराया जाएगा। प्रशिक्षण का संचालन पांच सदस्यीय राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर टीम करेगी। इसमें डीसी प्रशिक्षण धर्मनाथ, डायट प्रवक्ता धीरज कुमार यादव, एसआरजी ओमप्रकाश सिंह, एआरपी नरेश कुमार व नोडल शिक्षक संकुल अनूप मोहन शामिल हैं। यह टीम प्रतिभागियों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों, बाल-मनोविज्ञान आधारित गतिविधियों और दक्षता-आधारित शिक्षण पद्धतियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देगी। प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया जाएगा कि कक्षा-कक्षों का वातावरण बच्चों के लिए आकर्षक, सुरक्षित, आनंदमयी और सीखने के अनुकूल बनाया जाए। साथ ही ध्वनि व भाषा विकास, प्रारंभिक साक्षरता, संख्यात्मक समझ और गतिविधि आधारित शिक्षण के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया जाएगा। विशेषज्ञ शिक्षकों को यह भी बताएंगे कि किस प्रकार कहानियों, गीतों, खेलों और समूह गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में सीखने के प्रति रुचि विकसित की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक आयु में सुनाई जाने वाली कहानियां केवल भाषा विकास का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि वे बच्चों में सहयोग, अनुशासन, आत्मविश्वास, समस्या समाधान, संवेदनशीलता और निर्णय लेने जैसे जीवन कौशल भी विकसित करती हैं। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण में कहानी आधारित शिक्षण को विशेष स्थान दिया गया है। प्रशिक्षकों ने बताया कि प्रारंभिक शैशव देखभाल व शिक्षा बच्चों के संपूर्ण विकास की मजबूत नींव है। यदि विद्यालय और आंगनबाड़ी का वातावरण बच्चों के अनुकूल, उत्साहवर्धक और गतिविधि आधारित होगा तो सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी। इस पहल से जिले के सभी बाल वाटिका और आंगनबाड़ी केंद्रों के शैक्षणिक वातावरण में सकारात्मक बदलाव आने के साथ ही बच्चों के समग्र विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।







