Home उत्तर प्रदेश सिद्धार्थनगर में आभूषण स्नेचिंग गैंग का खौफ: ढेबरुआ पुलिस ने महिला टप्पेबाजों...

सिद्धार्थनगर में आभूषण स्नेचिंग गैंग का खौफ: ढेबरुआ पुलिस ने महिला टप्पेबाजों को भेजा जेल

युवाओं की मदद से खुली कड़ियां, गुरुवार को बोलेरो व चालक समेत अन्य हिरासत में; पहचान के बावजूद माल बरामदगी शून्य,
SIDHARTHNAGAR NEWS: जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों में पिछले काफी समय से सक्रिय अंतरजनपदीय टप्पेबाज़ी और आभूषण स्नेचिंग गिरोह के कारण आम जनता, विशेषकर महिलाओं में भारी आक्रोश और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। सबसे ज्यादा दहशत उन आम महिलाओं में है जो रोज़मर्रा के कामों या किसी ज़रूरी काम से ई-रिक्शा, ऑटो अथवा बसों में ‘अकेले सफर’ करती हैं। इस शातिर गैंग के खौफनाक तौर-तरीकों के कारण अकेले यात्रा करने वाली महिलाओं के भीतर इस कदर डर बैठ गया है कि वे अब घर से अकेले निकलने में भी कतराने लगी हैं। इस बीच, जनपद के ढेबरुआ थाना क्षेत्र से एक राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ क्षेत्र के जागरूक युवाओं के विशेष सहयोग और सक्रियता से इस कुख्यात आभूषण स्नेचिंग गैंग के सदस्यों को दबोचने में सफलता मिली। मामले में ढेबरुआ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मंगलवार को पकड़ी गई महिला आरोपियों से कड़ी पूछताछ के बाद बुधवार को सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर उन्हें जेल भेज दिया है। ढेबरुआ पुलिस की इस कार्रवाई की क्षेत्र में व्यापक प्रशंसा हो रही है, क्योंकि जिले के कई अन्य थाना क्षेत्रों में भी इस प्रकार की वारदातें लगातार हो रही हैं, जहाँ पीड़ित महिलाओं ने अज्ञात के खिलाफ थानों में तहरीर भी दे रखी थी, लेकिन सफलता हाथ नहीं लग पा रही थी। ऐसे में जागरूक युवाओं की मुस्तैदी और पुलिस द्वारा इस गिरोह के सदस्यों को पकड़ना कानून-व्यवस्था के लिहाज से एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
परंतु, इस बड़ी सफलता के बीच एक बेहद कड़वा और गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि थाने पहुंचे पीड़ितों द्वारा पकड़े गए आरोपियों की बाकायदा ‘अकाट्य पहचान’ (शिनाख्त) किए जाने के बावजूद, पुलिस कस्टडी में हुई पूछताछ में अब तक चोरी गए सोने-चांदी के जेवरातों की बरामदगी नहीं हो पाई है और माल की रिकवरी अब भी पूरी तरह शून्य है। इस ‘शून्य बरामदगी’ के कारण आम नागरिकों में भारी चिंता है, क्योंकि पीड़ितों द्वारा पहचान स्थापित होने के बाद भी लूटा गया माल बरामद न होना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती खड़ी करता है। कानून के जानकारों और प्रबुद्ध नागरिकों का स्पष्ट मानना है कि अगर गिरोह के सदस्य पकड़े गए हैं, तो निश्चित तौर पर इस पूरे नेटवर्क को पीछे से संचालित करने वाला कोई न कोई शातिर दिमाग ज़रूर है। ऐसे में इस आभूषण गैंग के पीछे वास्तव में कौन है और इस पूरे नेक्सस का असली सूत्रधार कौन है, इसकी पुख्ता जानकारी जुटाना पुलिस के लिए सबसे अहम काम है। प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि जब तक पुलिस इस गिरोह के पीछे छिपे असली चेहरों तक नहीं पहुँचती और समय रहते लूटे गए माल की रिकवरी सुनिश्चित नहीं कर पाती, तब तक ये शातिर अपराधी अदालत से बहुत जल्द जमानत पर छूट जाएंगे और दोबारा समाज के बीच अकेले सफर करने वाली भोली-भाली महिलाओं के लिए सिरदर्द बन जाएंगे। पीड़ितों द्वारा पहचान स्थापित होने के बाद भी इस संगठित नेक्सस के आका की कड़ियों का अब तक पूरी तरह बेनकाब न होना हर किसी को खटक रहा है।
मामले पर आधिकारिक पक्ष रखते हुए क्षेत्राधिकारी  शोहरतगढ़ मयंक द्विवेदी ने कहा,मंगलवार को पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजा जा चुका है, वहीं गुरुवार को पकड़ी गईं अन्य महिलाओं एवं चालक सहित बोलेरो गाड़ी को थाने लाकर कानून के दायरे में गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस इस पूरे रैकेट की हर एक कड़ी को साक्ष्यों के आधार पर जोड़ने में जुटी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस आभूषण गैंग के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं और माल कहाँ खपाया जा रहा है। शत-प्रतिशत माल की बरामदगी और रैकेट के खुलासे के लिए टीमें लगातार काम कर रही हैं। क्षेत्र में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सघन चेकिंग अभियान और पुलिसिया मुस्तैदी बढ़ा दी गई है।