जामिया व खानखाह-ए-अरफिया सैय्यद सरावां में बड़े धूमधाम से मनाया गया जश्ने ईद मिलादुन्नबी
PRAYAGRAJ NEWS: पैगंबर मुहम्मद साहब के आदर्श जीवन, करुणा शिक्षा, भाईचारा, प्रेम, न्याय और दया के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए शाह सफ़ी मेमोरियल ट्रस्ट सैय्यद सरावां की ओर से जश्ने ईद मिलादुन्नबी का आयोजन धूमधाम से मनाया गया। ‘अमन व शांति का पैगाम इंसानियत के नाम’ के तहत 18वीं मिलाद कांफ्रेंस का खानकाह-ए-अरफिया सैय्यद सरावां के जश्ने ईद मिलादुन्नबी अध्यक्षता शैख अब्बू सईद शाह एहसानुल्लाह उर्फ अब्बू मियां ने किया। संचालन दिल्ली के मोहम्मद अहमद एवं तराना सईदी ब्रदर्स द्वारा किया गया। शैख अब्बू सईद एहसानुल्लाह उर्फ अब्बू मियां ने कहा कि ईद मिलादुन्नबी दिलों में मोहब्बत और शुक्र अदा करने का दिन है। इस दिन नबी-ए-पाक की हदीसों को जिक्र किया जाता है, ताकि लोग अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकें। मौलाना जकी ने कहा हजरत मुहम्मद साहब ने इंसानियत, अमन और शांति का संदेश के साथ समाज से बुराई मिटाने और इंसाफ कायम करने की शिक्षा दी। डॉ सईद अहमद ने कहा कि इंसानियत को जिंदा रखने के लिए पैगंबर मुहम्मद साहब के जीवन, उनके आदर्शों, करुणा और शिक्षा, भाईचारा, प्रेम, न्याय और दया के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने की जरूरत है। आरिफ इकबाल ने कहा कि पैग़म्बर मोहम्मद साहब रहमतुल्लिल आलमीन यानी पूरी कायनात के लिए रहमत कहा गया है। सैयद सादिक हुसैनी ने कहा कि पैग़म्बर ने हमें सच बोलने, अमानतदारी निभाने, पड़ोसियों का ख्याल रखने और कमजोरों की मदद करने की शिक्षा दी। हमें उनके बताए रास्तों पर चलने में ही भलाई है। सीनियर एडवोकेट के.के राय और राजवेंद्र सिंह ने कहा कि मौजूदा दौर में जब समाज नफरत और मुश्किलों के दौर में भी ईद मिलादुन्नबी मोहब्बत, अमन और भाईचारे की याद दिलाता है। कहा कि इंसानियत ही मानव धर्म है। इस्लामिक मान्यता के अनुसार पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैदाइश 12 रबी-उल-अव्वल को मक्का में हुई थी। इसी वजह से मुसलमान हर साल इस दिन को मोहब्बत और अकीदत के साथ याद करते हैं। कार्यक्रम के दौरान, मौलाना ज़की, मौलाना आरिफ इक़बाल, मौलाना सैयद सादिक़ हुसैनी, डॉ सईद अहमद, सीनियर एडवोकेट के.के राय, एडवोकेट हाई कोर्ट राजवेंद्र सिंह प्रमुख वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। इनके अलावा ब्रिगेडियर सैयद अहमद अली, वीरेंद्र नारायण शुक्ला, लाला महराज, साजिद सईदी, दिलीप केसरवानी, हिमायत हुसैन, ग्राम प्रधान असद हुसैन, चुन्नू लाल विश्वकर्मा, श्याम नारायण यादव गाजीपुर, अफसार अहमद आदि के साथ सभी धर्म लोग शामिल हुए।







