कथा विश्राम दिवस पर उमड़े श्रद्धालु, संकीर्तन में हुए मंत्रमुग्ध
PRATAPGARH NEWS: बेलहा के समीप हिरऊ का पुरवा में मंगलवार को परीक्षित मोक्ष व सुदामा के भगवान से मिलन की कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर दिखे। कथाव्यास आचार्य धीरेन्द्रपाल कृष्ण त्रिपाठी ने बताया कि परीक्षित को शुकदेव जी द्वारा यह समझाया गया कि जीव की सदगति भी भगवत कृपा है। कथाव्यास ने कहा कि मृत्यु भी जन्म की तरह जीवन का शाश्वत सत्य है। उन्होने कहा कि मनुष्य को जीवनकाल में सतकर्म करते रहना चाहिए। उन्होने कहा कि सतकर्म और नैतिकता के मार्ग पर अडिग रहने वाले जीव पर भगवान की कृपा उसे मोक्ष प्रदान किया करती है। सुदामा और श्रीकृष्ण के मैत्री को समझाते हुए कथाव्यास ने बताया कि सुदामा ने विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी हरि भजन के जाप को जारी रखा। उन्होने कहा कि द्वारिकाधीश की परीक्षा में सुदामा की भक्ति भगवान की कृपा का मार्ग स्वयं प्रशस्त कर गयी। उन्होने कहा कि सुदामा ने भगवान से मिलन के बाद प्राप्त हुई भव्यता को त्याग कर कृष्ण नाम के ही उपासना मंत्र को प्राथमिकता प्रदान की। ऐसे में सुदामा भक्ति के आदर्श प्रेरणा बने। विश्राम दिवस पर भजन संकीर्तन में भी श्रीराधे जाप में भक्तों को निहाल देखा गया। संयोजक रामदुलारे यादव व लक्खू देवी तथा समाजसेवी पप्पू तिवारी ने कथाव्यास धीरेन्द्रपाल कृष्ण जी व महन्त उमापति दास जी को श्रद्धालुओं की ओर से आध्यात्मिक सम्मान सौंपा। इस मौके पर केशवदत्त पाण्डेय, ज्ञानप्रकाश शुक्ल, अनिल महेश, सौरभ तिवारी, श्याम नारायण तिवारी, राम मिलन यादव, अभिनव शुक्ल, अतुल शुक्ला, रंजन सिंह, संगम लाल दुबे, राजाराम यादव, विजय यादव, आचार्य पवन द्विवेदी, राजीव सिंह, मिथलेश यादव आदि रहे।







