छोटी काशी गोला में कुल हिन्द मुशायरे में गूंजे अमन-एकता के तराने
छोटी काशी के ऐतिहासिक मेला चैती 2026 के उन्नीसवें दिन सांस्कृतिक मंच पर आयोजित ‘कुल हिन्द मुशायरा’ शायरी, सद्भाव और गंगा-जमुनी तहज़ीब का गवाह बना। देर रात तक चले इस मुशायरे में देशभर से आए शायरों ने मोहब्बत, इंसानियत और भाईचारे की ऐसी शमा रोशन की कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व जिला पंचायत सदस्य राजा जफर उल्ला खां, कार्यक्रम अध्यक्ष गोला पब्लिक इंटर कॉलेज प्रबंधक बीए खान एवं विशिष्ट अतिथियों ने शमा रोशन कर किया। समाजसेवी सलीम खां, रकीम खां, अयूब खां, मौलाना आजाद काशमी, हाफिज शकील, अफसर खां, एड. अमीन, राजा राम वर्मा, डॉ. समर्पित मिश्रा, ज्योतिषाचार्य अनुज सिंह कछवाहा, विजय राठी, कर्म सिंह, गुरुदेव शर्मा, एड. विवेक अवस्थी, शिवेन्द्र अनुराग, सरोज आरिफ, जय शंकर प्रसाद शुक्ला, भाजपा जिला मंत्री उमेश शुक्ला, भाजयुमो जिला अध्यक्ष राम पाण्डेय व नगर पालिका अध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू सहित तमाम गणमान्य मौजूद रहे। सभी अतिथियों का स्मृति चिह्न व पुष्प मालाओं से स्वागत किया गया।
“चेयरमैन साहब सभी धर्मों का सम्मान करते हैं”
मुख्य अतिथि राजा जफर उल्ला खां ने कहा, “चेयरमैन साहब सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। वह कांवरियों पर पुष्प वर्षा करते हैं तो बारावफात और नगर कीर्तन पर भी पुष्प वर्षा करते हैं।”
कार्यक्रम अध्यक्ष बीए खान बोले, “पालिकाध्यक्ष की कार्यशैली बहुत अच्छी है। वह काम को कल के लिए नहीं छोड़ते।”
नगर पालिका अध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू ने आभार जताते हुए कहा, “मैंने मेला चैती के मंच पर सभी वरिष्ठजनों को आमंत्रित किया है। राजनैतिक दल, कार्य पद्धति भले ही अलग हो, मैं गोला नगर को अपना परिवार मानता हूँ।”
शायरों ने बाँधा समाँ, देर रात तक डटे रहे श्रोता
संयोजक मधुकर शैदाई के कुशल मार्गदर्शन में मुशायरे की शुरुआत हुई।
सलमान घोसवी ने फरमाया—
_जां से बढ़कर भी चाहा जिसे हॉ वही बेबफा हो गया।_
_क्यों भला गमजदा मैं रहूं, जो मुकद्दर में था हो गया।_
झ्हाज देवबन्दी ने गंज पर तंज कसते हुए कहा—
_एक गंजे ने कहा ये डॉक्टर से एक दिन_
_मेरे गंजेपन में मेरा हाल ऐसा हो लिया।_
_हर सुबह ये है मुसीबत क्या बताऊं डॉक्टर_
_ये पता चलता नहीं कि मुंह कहां तक धो लिया।।_
मुजफ्फरनगर के खुर्शीद हैदर बोले—
_गैर परों पर उड़ सकते हो हद से हद दीवारों तक,_
_अम्बर पर तो वही उड़ेंगे जिनके अपने पर होंगे।_
कोटा राजस्थान के कुंवर जावेद ने साफ लफ्जों में कहा—
_वह लोग साहिबे कुरआन हो नहीं सकते,_
_किसी भी धर्म की पहचान हो नहीं सकते।।_
_जो उग्रवाद को यारों जिहाद कहते हैं,_
_वह और कुछ हैं मुसलमान हो नहीं सकते।।_
सीतापुर की अलीशा मेराज ने बेटियों का हौसला बुलंद करते हुए पढ़ा—
_नजर में जीत के सपने कदम में जान रखती है_
_पिता की लाडली आंखों में उनकी शान रखती है।_
सबा बलरामपुरी ने इश्क का अंदाज बयां किया—
_तेरे नाज उठाऊं कैसे मुझे तर्जुबा नहीं है।
मेरा इश्क है पहला कोई दूसरा नहीं है।
इसके साथ ही मंजर भोपाली ने अपने कलाम से देर रात तक दर्शकों को बांधे रखा। अंत में मधुकर शैदाई ने पढ़ा
मुझको प्यारी सभी जुबान,
ऊर्दू मेरा जिस्म है, हिन्दी मेरी जान
कार्यक्रम में अमन, मोहब्बत और एकता का पैगाम गूंजता रहा।







