जनता का सवाल—सट्टेबाजों पर कानून का बुलडोजर कब गरजेगा?
JHANSI NEWS: जनपद में लगातार सट्टेबाजों के पकड़े जाने और बड़े नेटवर्क के खुलासों के बावजूद आम जनता के बीच एक बड़ा सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर इन अवैध कारोबारियों की अकूत संपत्तियों पर प्रशासन का बुलडोजर कब चलेगा? अब तक अवैध खनन, भू-माफिया, कब्जेदारों और अपराध से अर्जित संपत्तियों पर प्रशासनिक कार्रवाई के तहत बुलडोजर चलाए जाते रहे हैं, लेकिन सट्टे के कारोबार से करोड़ों की कमाई करने वालों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही? शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में समय-समय पर पुलिस द्वारा सट्टेबाजों को गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्रवाई की जाती रही है। हाल के दिनों में भी कई नाम सामने आए, कई लोगों की गिरफ्तारी हुई और बड़ी रकम बरामद होने के दावे किए गए। इसके बावजूद लोगों का कहना है कि गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद अधिकांश आरोपी फिर से सक्रिय दिखाई देने लगते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या केवल जेल भेज देना ही पर्याप्त कार्रवाई है या फिर उनके आर्थिक साम्राज्य पर भी चोट की आवश्यकता है?
जनता के बीच चर्चा है कि यदि किसी व्यक्ति ने अवैध सट्टे के कारोबार से करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की है तो उसकी जांच कर अवैध आय के स्रोतों का पता लगाया जाना चाहिए। आखिर वह कौन-सा तंत्र है जिसके बल पर सट्टे का कारोबार वर्षों तक फलता-फूलता रहा और करोड़ों की चल-अचल संपत्तियां खड़ी होती चली गईं? लोगों का मानना है कि जब तक अवैध कमाई से खड़ी संपत्तियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाना मुश्किल होगा।
सबसे अधिक सवाल उन आरोपियों को लेकर उठ रहे हैं जो कार्रवाई के बाद भी फरार बताए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि हर बार कुछ नामों को फरार दिखाकर फाइलों में दर्ज कर लिया जाता है, लेकिन उनकी गिरफ्तारी के लिए वैसी सक्रियता नजर नहीं आती जैसी आम मामलों में दिखाई देती है। आखिर फरार आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी क्यों हो रही है? क्या उन्हें संरक्षण प्राप्त है या फिर कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित है? शहर के सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि सरकार और प्रशासन अपराध के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम कर रहे हैं तो सट्टेबाजी जैसे संगठित आर्थिक अपराधों के मामलों में भी उसी कठोरता की आवश्यकता है। केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि अवैध संपत्तियों की जांच, बैंक खातों की पड़ताल, बेनामी निवेशों की पहचान और जरूरत पड़ने पर ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई भी होनी चाहिए। जनता अब प्रशासन से जवाब चाहती है कि जिन लोगों पर अवैध कारोबार से संपत्ति अर्जित करने के आरोप हैं, उनकी संपत्तियों की जांच कब होगी? फरार चल रहे आरोपियों को कब तक पकड़ा जाएगा? और सबसे बड़ा सवाल—क्या सट्टेबाजों के खिलाफ भी वही बुलडोजर नीति लागू होगी जो अन्य अपराधियों के मामलों में देखने को मिलती है, या फिर यह कार्रवाई केवल चुनिंदा मामलों तक ही सीमित रहेगी?
फिलहाल शहर की निगाहें प्रशासन और पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। लोग इंतजार कर रहे हैं कि सट्टे के कारोबार पर सिर्फ गिरफ्तारी का प्रतीकात्मक डंडा चलेगा या फिर अवैध कमाई के पूरे नेटवर्क पर कानून का बुलडोजर भी गरजेगा।







