11 लाख का सपना 5 लाख में बिखरा 6 लाख कहां गए हिसाब कौन करे?
LAKHIMPUR KHERI NEWS: बेसिक शिक्षा के आंगन में फिर एक बार भ्रष्टाचार की धूल उड़ी है। ब्लॉक फूलबेहड़ के प्राथमिक विद्यालय ग्रंट नंबर 10 में बने अतिरिक्त कक्षा-कक्ष की ईंट-ईंट चीखकर कह रही है कि उसके साथ इंसाफ नहीं हुआ। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई है कि तकनीकी नजरों से इस जख्म को देखा जाए।
बजट था सागर सा, खर्च हुआ कतरा-कतरा
सरकार ने मासूमों के सपनों के लिए 11 लाख का आसरा दिया था। इल्ज़ाम है कि प्रधानाध्यापिका श्रुति श्रीवास्तव की निगरानी में मानकों को ताक पर रखकर बुनियाद रखी गई। नाम न बताने की शर्त पर गांव वालों ने कहा कि नींव से छत तक सीमेंट की जगह बालू की कहानी लिखी गई। 5 लाख में दीवारें खड़ी कर दी गईं, और बाकी 6 लाख का पता नहीं। कहते हैं, जांच करने वाले भी कागज़ काले कर चले जाते हैं।
थाली में निवाला कम, तालीम में उजाला कम
मिड-डे-मील की दास्तां भी दर्द भरी है। अभिभावकों का दर्द है कि दूध में पानी का दरिया बहाया जाता है। कुछ जुबां तो यह भी कहती हैं कि दूध का हिस्सा घर की केतली तक पहुंच जाता है। न मात्रा पूरी, न पोषण का वादा पूरा। तालीम के चिराग भी टिमटिमा रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि उस्ताद वक्त पर नहीं आते, और स्कूल में इल्म के बदले वक्त यूं ही गुजर जाता है। गरीब के बच्चे हैं, सो खामोशी ही उनकी ज़ुबान बन गई है।
रंग भी उतर गए, संग भी बदल गए
कायाकल्प की रंगाई पर भी सवालों की बौछार है। घटिया रंग ऐसा कि दीवारों से कुछ ही दिनों में पपड़ी की तरह उम्मीदें उतरने लगीं।
इंसाफ की फरियाद, चार बातें बेलिबास
जिलाधिकारी साहब, तकनीकी टीम भेजकर दीवारों की सच्चाई नाप लें।
मिड-डे-मील की थाली की औचक तलाशी हो।
गुनहगार मिले तो दामन से दाम वसूला जाए, और कुर्सी से हिसाब लिया जाए।
इमारत फिर से उसूलों की ईंट से उठाई जाए।
कायदे की किताब क्या कहती है
कायदा कहता है कि कक्षा-कक्ष स्कूल प्रबंध समिति की आंखों के सामने, पीडब्ल्यूडी के पैमाने से बने। नींव से छत तक हर नाप तय है। मिड-डे-मील में भी हर निवाले का वजन और ताकत तय है। अब विभाग की जांच ही बताएगी कि परदे के पीछे सच्चाई क्या है।







