विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा को समावेशी बनाने के लिए चार दिवसीय प्रशिक्षण शुरू 52 स्पेशल एजुकेटर्स को दिया जा रहा प्रशिक्षण, च्त्।ैभ्।ैज् ऐप और स्क्रीनिंग प्रक्रिया की सीखेंगे बारीकियां
प्रयागराज। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सोमवार को राज्य शिक्षा संस्थान, एलनगंज में चार दिवसीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। समग्र शिक्षा, उत्तर प्रदेश के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार ने किया। प्रशिक्षण 15 अक्टूबर तक चलेगा, जिसमें जनपद के 52 स्पेशल एजुकेटर्स प्रतिभाग कर रहे हैं।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार ने कहा कि समावेशी शिक्षा वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। प्रत्येक बच्चे को उसकी क्षमता और जरूरत के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समयबद्ध पहचान, स्क्रीनिंग और उपयुक्त शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) का उपयोग उनके शैक्षिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने प्रशिक्षुओं से प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान और कौशल को विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू करने का आह्वान किया, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा की मुख्यधारा से वंचित न रहे।
जिला समन्वयक (समेकित शिक्षा) विकास पाण्डेय ने बताया कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान एवं स्क्रीनिंग प्रक्रिया को मजबूत करना तथा च्त्।ैभ्।ैज् ऐप और पोर्टल के उपयोग के प्रति शिक्षकों की दक्षता बढ़ाना है। मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से जनपद के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों तक समावेशी शिक्षा की अवधारणा और व्यावहारिक जानकारी पहुंचाई जाएगी।
प्रशिक्षण के दौरान बच्चों की व्यक्तिगत शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण सामग्री के चयन एवं उपयोग, च्त्।ैभ्।ैज् ऐप-पोर्टल के संचालन तथा विद्यालयों में समावेशी वातावरण विकसित करने के संबंध में जानकारी दी जा रही है। इसका उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शैक्षिक सहभागिता, सीखने के स्तर और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम में डायट प्रवक्ता अम्बिका मिश्रा, डॉ. निधि मिश्रा, डॉ. पूनम सिंह और कासिम फारुकी सहित मास्टर ट्रेनर्स धीरेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, राहुल कुमार एवं अमित कुमार विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दे रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन जिला समन्वयक विकास पाण्डेय कर रहे हैं।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार ने कहा कि समावेशी शिक्षा वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। प्रत्येक बच्चे को उसकी क्षमता और जरूरत के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समयबद्ध पहचान, स्क्रीनिंग और उपयुक्त शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) का उपयोग उनके शैक्षिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने प्रशिक्षुओं से प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान और कौशल को विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू करने का आह्वान किया, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा की मुख्यधारा से वंचित न रहे।
जिला समन्वयक (समेकित शिक्षा) विकास पाण्डेय ने बताया कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान एवं स्क्रीनिंग प्रक्रिया को मजबूत करना तथा च्त्।ैभ्।ैज् ऐप और पोर्टल के उपयोग के प्रति शिक्षकों की दक्षता बढ़ाना है। मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से जनपद के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों तक समावेशी शिक्षा की अवधारणा और व्यावहारिक जानकारी पहुंचाई जाएगी।
प्रशिक्षण के दौरान बच्चों की व्यक्तिगत शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण सामग्री के चयन एवं उपयोग, च्त्।ैभ्।ैज् ऐप-पोर्टल के संचालन तथा विद्यालयों में समावेशी वातावरण विकसित करने के संबंध में जानकारी दी जा रही है। इसका उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शैक्षिक सहभागिता, सीखने के स्तर और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम में डायट प्रवक्ता अम्बिका मिश्रा, डॉ. निधि मिश्रा, डॉ. पूनम सिंह और कासिम फारुकी सहित मास्टर ट्रेनर्स धीरेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, राहुल कुमार एवं अमित कुमार विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दे रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन जिला समन्वयक विकास पाण्डेय कर रहे हैं।