राजनीतिक विरोध में भाषा की मर्यादा जरूरी, व्यक्तिगत कटाक्ष से गरिमा होती है प्रभावित बड़ागांव ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि की कथित टिप्पणी पर सोनू यादव अमरौख ने जताई नाराजगी, कहा—विचारों से करें विरोध
झांसी। राजनीतिक बयानबाजी के बीच नेताओं की भाषा और आचरण को लेकर समाजवादी पार्टी के युवा नेता सोनू यादव अमरौख ने नाराजगी जताई है। बड़ागांव ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि की ओर से सपा के वरिष्ठ नेता के लिए की गई कथित टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन विरोध के नाम पर किसी नेता के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल उचित नहीं है।
सोनू यादव अमरौख ने कहा कि किसी वरिष्ठ नेता को ‘शेर नहीं, गीदड़’ कहना राजनीतिक बहस को मुद्दों से हटाकर व्यक्तिगत टिप्पणी तक सीमित करने जैसा है। उन्होंने कहा कि राजनीति में किसी की नीतियों, कार्यशैली और विचारधारा से असहमति हो सकती है, लेकिन अपनी बात रखने के लिए भाषा की गरिमा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जनता राजनीतिक दलों और उनके प्रतिनिधियों से विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा स्थानीय समस्याओं पर सार्थक चर्चा की अपेक्षा करती है। ऐसे में नेताओं के बीच होने वाली बयानबाजी यदि व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सिमट जाए तो जनहित के मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। राजनीतिक विरोध को स्वस्थ बहस का माध्यम बनाया जाना चाहिए, न कि एक-दूसरे को नीचा दिखाने का।
सपा नेता ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति और राजनीतिक विचारधारा का सम्मान होना चाहिए। सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोगों की भाषा का समाज पर भी प्रभाव पड़ता है, इसलिए उन्हें अपने शब्दों के चयन में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं से संयमित भाषा अपनाने तथा जनसमस्याओं को प्राथमिकता देने की अपील की।